रक्षाबंधन का पावन त्योहार, भाई की कलाई पर राखी बांधने की खुशी और घर पहुंचने की जल्दबाजी। लेकिन मथुरा के बलदेव में त्यौहार की खुशियां उस वक्त फीकी पड़ गईं जब सड़कों पर गाड़ियां घंटों तक रेंगती नजर आईं। अवैरनी चौराहे से नरहौली तक लगा करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लोगों के सब्र का इम्तिहान ले रहा था।
सड़क पर बेबस हुई आम जनता
त्योहार के दिन सड़कों पर भीड़ होना स्वाभाविक है, लेकिन प्रशासन की लचर व्यवस्था ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। चिलचिलाती गर्मी और उमस भरी दोपहर में सड़क पर फंसे वाहन चालकों का बुरा हाल था। सबसे ज्यादा परेशानी उन बहनों को हुई जो अपने भाइयों के घर राखी बांधने निकल रही थीं।
बस और निजी वाहनों में बैठी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के चेहरे पर साफ मायूसी देखी जा सकती थी। घंटों तक एक ही जगह थमे पहियों के कारण लोग सड़क पर उतरने को मजबूर हो गए, लेकिन कहीं भी यातायात पुलिस का कोई जवान मोर्चा संभालता नजर नहीं आया।
नियम-कायदों की उड़ी धज्जियां
बलदेव क्षेत्र में लगे इस जाम के पीछे अव्यवस्थित तरीके से खड़े वाहन और ट्रैफिक मैनेजमेंट का अभाव मुख्य कारण रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि त्यौहारों जैसे महत्वपूर्ण समय पर जब भारी भीड़ की उम्मीद थी, तब भी पुलिस का कोई इंतजाम न होना बड़ी लापरवाही है।
- जाम का दायरा: अवैरनी चौराहा से नरहौली तक पूरी तरह ठप।
- परेशानी: भीषण गर्मी और उमस ने बच्चों और बुजुर्गों की हालत बिगाड़ी।
- प्रशासन: मौके पर ट्रैफिक पुलिस नदारद रही।
मायने और प्रभाव
इस घटना का सीधा असर आम नागरिक के जीवन पर पड़ा है, जो त्यौहार के दिन परिवार के साथ खुशियां मनाने के बजाय सड़क पर पसीना बहाते नजर आए। यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। क्या शहर के प्रमुख चौराहों पर त्यौहारों के लिए कोई पूर्व-नियोजित ट्रैफिक प्लान नहीं होता? अगर प्रशासन समय रहते वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करता या ट्रैफिक जवानों को तैनात करता, तो हजारों लोग घंटों की इस परेशानी से बच सकते थे। यह घटना आने वाले त्योहारों के लिए एक सबक है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की मौजूदगी महज दिखावा नहीं, बल्कि सुरक्षा और सुगमता के लिए अनिवार्य है।




