औरैया जिले में बेसहारा पशुओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीरपुर गांव में रात के अंधेरे में अपनी फसल की रखवाली करने गए एक किसान की आवारा सांड के हमले में दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत पैदा कर दी है और ग्रामीण प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बीरपुर गांव के रहने वाले किसान अपनी मेहनत की कमाई यानी तैयार फसल को जंगली जानवरों और आवारा पशुओं से बचाने के लिए खेत पर गए थे। इसी दौरान वहां मौजूद एक आक्रामक सांड ने अचानक उन पर हमला कर दिया।
सांड ने किसान को बुरी तरह पटक दिया, जिससे उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।

प्रशासन की विफलता पर ग्रामीणों में आक्रोश
गांव वालों का कहना है कि आवारा पशुओं की समस्या को लेकर वे कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। रात के समय खेतों की रखवाली करना किसानों की मजबूरी बन गया है, लेकिन अब यह काम जानलेवा साबित हो रहा है।
मायने और प्रभाव
- सुरक्षा का संकट: खेतों में फसल की सुरक्षा करने वाले किसानों के लिए आवारा पशु अब सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं।
- आर्थिक तंगी: फसल बचाने के चक्कर में जान गंवाने वाले परिवारों के सामने अब भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
- प्रशासनिक जवाबदेही: गौशालाओं की लचर व्यवस्था और सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं के प्रबंधन पर सरकार को तत्काल कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
यह घटना केवल एक परिवार का नुकसान नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था की पोल खोलती है जो अभी भी ग्रामीण इलाकों में पशु-मानव संघर्ष को रोकने में नाकाम साबित हो रही है।



