उन्नाव में गंगा का रौद्र रूप अब जानलेवा साबित हो रहा है। आलम यह है कि बाढ़ के पानी ने गांवों का मुख्य रास्तों से संपर्क पूरी तरह काट दिया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं का पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। गुरुवार को एक ऐसी ही हृदयविदारक स्थिति सामने आई, जब प्रसव पीड़ा से तड़प रही दो महिलाओं की जान बचाने के लिए प्रशासन को नाव का सहारा लेना पड़ा।
खतरे के निशान के करीब गंगा, डूबे रास्ते
बांगरमऊ तहसील के कटरी क्षेत्र में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। गंगा का जलस्तर 112.820 मीटर तक पहुंच चुका है और यह खतरे के निशान 113 मीटर से महज 18 सेंटीमीटर दूर है। पानी के बहाव और जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी ने जगत नगर-सहजनी मार्ग को जलमग्न कर दिया है, जिससे कई गांवों का संपर्क मुख्य शहर से टूट गया है।
नाव बनी ‘संजीवनी’, समय पर अस्पताल पहुंचीं महिलाएं
गदनपुर आहार, नयापुरवा, कुशालपुरवा, हरीगंज, धन्नापुरवा और मल्लाहनपुरवा गांवों में रहने वाले लोग अब टापू जैसी स्थिति में हैं। धन्नापुरवा की रहने वाली शानू और संध्या को जब प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तो परिजनों ने तुरंत एंबुलेंस को फोन किया। हालांकि, सड़कें पानी में डूबी होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी।
परिस्थितियों को भांपते हुए सीएचओ मानसी, आशा वर्कर रूबी और मालती ने तत्परता दिखाई। वे नाव के जरिए सीधे गांव पहुंचीं और दोनों गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाला। मुख्य सड़क तक पहुंचने के बाद, महिलाओं को एंबुलेंस से सुरक्षित सीएचसी पहुंचाया गया, जहां वे उपचार के अधीन हैं।
मायने और प्रभाव: सिस्टम की चुनौतियों पर एक नजर
यह घटना बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की पोल खोलती है। जब भी गंगा का जलस्तर बढ़ता है, तब ये गांव दुनिया से कट जाते हैं और एक साधारण मेडिकल इमरजेंसी भी बड़ी मुसीबत बन जाती है।
- प्रशासनिक तैयारी: इस घटना ने साबित कर दिया कि बाढ़ वाले इलाकों में चिकित्सा विभाग को नाव और बचाव दलों के साथ पहले से ही सक्रिय रहने की जरूरत है।
- सुरक्षा का सवाल: ग्रामीणों के लिए जलमग्न रास्तों पर चलना हर पल जोखिम भरा है। स्थानीय प्रशासन को आवागमन के वैकल्पिक इंतजामों को प्राथमिकता पर रखना होगा।
- मानवीय संवेदना: मेडिकल टीम का समय पर पहुंचना बताता है कि संसाधन भले ही कम हों, लेकिन सही समय पर लिया गया फैसला किसी की जान बचा सकता है।



