सावन का महीना है और आगरा की सड़कों पर आस्था का सैलाब उमड़ने को तैयार है। रविवार को होने वाली 44 किलोमीटर लंबी शिव परिक्रमा के लिए हज़ारों शिवभक्तों ने कमर कस ली है। वे नंगे पैर निकलेंगे, भक्ति में लीन होंगे, लेकिन इस बार उनकी राह आसान नहीं, बल्कि कांटों भरी और अंधेरे में डूबी हुई है।
44 किमी की यात्रा और खराब स्ट्रीट लाइटें
आगरा के इस विशेष परिक्रमा मार्ग पर छह प्रमुख शिवालय पड़ते हैं। हर साल लाखों भक्त इस यात्रा को पूरा करते हैं, लेकिन इस बार व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। भारी बारिश के चलते शहर और परिक्रमा मार्ग की करीब 4,000 स्ट्रीट लाइटें फुंके हुए बल्ब की तरह बेकार हो चुकी हैं।
प्रशासन का दावा बनाम ज़मीनी हकीकत
प्रशासन ने बड़े-बड़े दावे तो किए थे, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी कई मुख्य मार्ग घने अंधेरे में डूबे हैं। नंगे पैर चलने वाले भक्तों के लिए यह अंधेरा न केवल असुविधाजनक है, बल्कि दुर्घटनाओं का भी डर बना हुआ है। सड़कों पर जलभराव और अंधेरे का कॉम्बिनेशन किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।
मायने और प्रभाव
- सुरक्षा का सवाल: अंधेरा होने के कारण महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ चलने वाले भक्तों की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा है।
- प्रशासनिक विफलता: 4,000 लाइटों का खराब होना सीधे तौर पर नगर निगम की लचर कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
- आस्था का परीक्षण: भक्त तो अपनी निष्ठा के साथ निकलेंगे, लेकिन प्रशासन की यह लापरवाही आगरा की व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा करती है।
क्या चंद घंटों में इन लाइटों को ठीक कर पाना मुमकिन होगा? अगर नहीं, तो प्रशासन के पास भक्तों की सुरक्षा के लिए ‘प्लान बी’ क्या है? यह वह सवाल है जो आज आगरा के हर शिवभक्त की जुबान पर है।




