आगरा की सड़कों पर इस वक्त एक अजीबोगरीब वाकया चर्चा का विषय बना हुआ है। ‘सीएम ग्रिड रोड’ के निर्माण के नाम पर दिल्ली गेट के पास से हटाए गए 95 विशाल पॉम के पेड़ अचानक गायब हो गए हैं। नगर निगम का दावा है कि इन पेड़ों को भगवान टॉकीज फ्लाईओवर पर सुरक्षित शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
दावे बनाम हकीकत: क्या हुआ उन पेड़ों का?
जब हमारी टीम ने निगम के दावों की पड़ताल करने के लिए भगवान टॉकीज फ्लाईओवर का दौरा किया, तो नजारा चौंकाने वाला था। जिन पेड़ों को बड़े और परिपक्व होने का दावा किया गया था, उनकी जगह वहां बेहद छोटे, महज एक या दो फीट के पौधे नजर आए। ये पौधे गमलों में लगे हुए थे, जो किसी भी तरह से उन पुराने पेड़ों की जगह नहीं ले सकते जिन्हें निर्माण कार्य के लिए हटाया गया था।
क्या है ट्रांसलोकेशन का नियम?
पेड़ों का ट्रांसलोकेशन यानी उन्हें एक जगह से दूसरी जगह वैज्ञानिक तरीके से लगाना कोई मामूली काम नहीं है। इसके लिए पेड़ों की जड़ों को सुरक्षित रखने और उनके पोषण के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं।
- 95 पेड़ों को शिफ्ट करने का था निगम का दावा।
- पड़ताल में सिर्फ गमलों में लगे छोटे पौधे मिले।
- पुराने पेड़ों के अस्तित्व पर अब बड़ा सवालिया निशान।
मायने और प्रभाव
यह मामला महज पेड़ लगाने या हटाने का नहीं है, बल्कि जवाबदेही का है। शहर के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ आम जनता की चिंता का विषय है। अगर नगर निगम के दावों में इतनी बड़ी विसंगति है, तो यह स्पष्ट है कि वृक्षारोपण और संरक्षण के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। आम नागरिकों को यह पूछने का हक है कि उनके शहर की हरियाली आखिर गई कहां और इन छोटे पौधों के नाम पर जनता की आंखों में धूल क्यों झोंकी जा रही है?




