आगरा के रावली इलाके में एक 74 वर्षीय बुजुर्ग पिता का दर्द और चीखें प्रशासन के दावों पर सवाल खड़ी कर रही हैं। कंपाउंडर ललित की मौत के बाद से उनका परिवार पूरी तरह टूट चुका है। पिता चंदन सिंह का आरोप है कि जिन पुलिसकर्मियों को सुरक्षा के लिए रखा गया था, उन्हीं की वजह से उनके घर का चिराग बुझ गया।
पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
पीड़ित पिता का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते ललित को अस्पताल ले जाती, तो शायद आज वह जीवित होता। आरोप है कि घटना के वक्त पुलिसकर्मी ललित के साथ झड़प कर रहे थे, जिसके बाद वह छत से नीचे गिर गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस के जाने के बाद आरोपी सिपाही उसे मरणासन्न अवस्था में छोड़कर मौके से फरार हो गए।
सीसीटीवी चिप गायब होने से बढ़ी सनसनी
इस मामले में लीपापोती के आरोप भी लग रहे हैं। पिता चंदन सिंह ने बताया कि जिस जगह हादसा हुआ, वहां सामने लगे सीसीटीवी कैमरे से पुलिसकर्मी चिप निकालकर ले गए। परिवार को डर है कि सबूतों को मिटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से अभी तक उन्हें तहरीर की कोई रिसीविंग नहीं दी गई है, जो कानूनी प्रक्रिया पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
अनाथ हो गई दो मासूम बेटियां
ललित की आठ साल की बेटी वंशिका और डेढ़ महीने की नन्ही भाग्यश्री अब पिता के साये से महरूम हो गई हैं। करवाचौथ के ठीक पहले हुई इस घटना ने पूरे परिवार को गहरा सदमा दिया है। घर में आर्थिक तंगी का आलम है, क्योंकि ललित ही परिवार का मुख्य सहारा था।
मायने और प्रभाव
यह मामला पुलिस और जनता के बीच के भरोसे की कमी को दर्शाता है। आगरा में हुई इस घटना का असर यह है कि स्थानीय लोग अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं। मामले की जांच एसीपी स्तर पर की जा रही है, लेकिन परिवार की मांग है कि दोषियों पर सिर्फ निलंबन नहीं, बल्कि हत्या की धाराओं में सख्त मुकदमा दर्ज हो। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि पुलिस की ‘चीता मोबाइल’ जैसी गश्त वाली इकाइयों को अधिक संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करने की जरूरत है।




