राम मंदिर निर्माण और संचालन की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जाने वाला है। अयोध्या में दो सितंबर को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिस पर देशभर की नज़रें टिकी हैं। इस बैठक का मुख्य केंद्र राम मंदिर के लिए पहले स्थायी सीईओ (CEO) की नियुक्ति है।
सीईओ पद के लिए रेस तेज
लंबे समय से राम मंदिर के सुव्यवस्थित संचालन के लिए एक पेशेवर सीईओ की मांग उठ रही थी। जानकारी के मुताबिक, सीईओ के चयन के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति ने अपना होमवर्क पूरा कर लिया है। साक्षात्कार की प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है और तीन नामों का एक फाइनल पैनल तैयार किया गया है।
माना जा रहा है कि बैठक के दौरान इन नामों पर अंतिम मुहर लग सकती है। यह नियुक्ति मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को नई गति देने वाली होगी।
कृष्ण मोहन बने रहेंगे महासचिव
ट्रस्ट की संगठनात्मक संरचना में भी स्पष्टता दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव के पद पर कृष्ण मोहन की भूमिका को यथावत रखा जाएगा। वे मंदिर निर्माण से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालना जारी रखेंगे।
मायने और प्रभाव
यह बैठक केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राम मंदिर के भविष्य के मैनेजमेंट के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
- प्रशासनिक मजबूती: सीईओ की नियुक्ति से मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों की सुविधा, सुरक्षा और व्यवस्था को एक प्रोफेशनल लुक मिलेगा।
- आर्थिक प्रबंधन: दान और मंदिर की आय-व्यय के ऑडिट को और भी पारदर्शी बनाने में नए सीईओ की भूमिका अहम होगी।
- तीर्थयात्रियों को लाभ: अयोध्या आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं और सिस्टम विकसित करना नई टीम की प्राथमिकता होगी।
आने वाले समय में अयोध्या का स्वरूप केवल एक धार्मिक नगरी का नहीं, बल्कि आधुनिक प्रबंधन का एक मॉडल भी बनने जा रहा है, जिसकी कमान अब पेशेवर हाथों में होगी।

