उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘हाथी’ ने एक बार फिर अपनी चाल तेज कर दी है। साल 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर लग सकते हैं, लेकिन बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी ने इस बार संगठन को धार देने के साथ ही कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर भी गहरी पकड़ बनाने की तैयारी की है।
सतीश चंद्र मिश्र पर दांव
पार्टी की ओर से सबसे बड़ा फेरबदल अनुभवी नेता और कानूनी मामलों के जानकार सतीश चंद्र मिश्र के कंधों पर जिम्मेदारी देकर किया गया है। उन्हें विशेष रूप से चुनाव आयोग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अधिकृत किया गया है। सतीश चंद्र मिश्र का कानूनी अनुभव पार्टी के लिए ‘ट्रबल शूटर’ साबित हो सकता है।
सर्वसमाज को जोड़ने की मुहिम
बीएसपी का ध्यान इस बार केवल अपने पुराने वोट बैंक पर नहीं, बल्कि ‘सर्वसमाज’ को साधने पर है। पार्टी आलाकमान ने निर्देश दिए हैं कि विधानसभा स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाएं ताकि जमीन से जुड़कर संगठन की मजबूती को परखा जा सके।
- हर विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ताओं की टीम का गठन।
- सोशल इंजीनियरिंग के जरिए नए वर्गों को पार्टी से जोड़ना।
- बूथ स्तर तक पार्टी के ढांचे को दोबारा सक्रिय करना।
मायने और प्रभाव
बीएसपी का यह कदम यूपी की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। बीते कुछ चुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद, अब बसपा रणनीतिक बदलाव कर रही है। सतीश चंद्र मिश्र को चुनाव आयोग से जुड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी यह संदेश दे रही है कि वह चुनावी प्रक्रिया के हर बारीक पेच पर नजर रखना चाहती है। यदि बसपा अपने पुराने ‘वोट बैंक’ और ‘सर्वसमाज’ के नए समीकरणों को सही से साध पाई, तो 2027 के चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला और अधिक दिलचस्प होने के आसार हैं।




