उत्तर प्रदेश में पुलिसिंग और जनसुनवाई के मोर्चे पर बरेली रेंज ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मई महीने की IGRS (इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम) रैंकिंग में बरेली परिक्षेत्र ने पूरे प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया है कि आम जनता की शिकायतों का समाधान अब प्राथमिकता बन गया है।
61 थानों का जलवा, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई
इस रैंकिंग में केवल रेंज का प्रदर्शन ही शानदार नहीं रहा, बल्कि बरेली परिक्षेत्र के 61 थानों ने भी शीर्ष रैंक प्राप्त कर एक नई मिसाल पेश की है। डीआईजी अजय कुमार साहनी ने इस उपलब्धि का श्रेय पुलिस टीम की तत्परता और शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को दिया है।
क्या है IGRS रैंकिंग और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
IGRS वह प्रणाली है जिसके जरिए आम नागरिक अपनी समस्याओं को सीधे सरकार और उच्च अधिकारियों तक पहुंचाते हैं। रैंकिंग के मुख्य मानक इस प्रकार हैं:
- समयबद्धता: शिकायतों का निर्धारित समय सीमा के भीतर निपटारा।
- गुणवत्ता: समस्या का पूर्ण समाधान न कि केवल खानापूर्ति।
- फीडबैक: शिकायतकर्ता का संतुष्टि स्तर।
मायने और प्रभाव: आम जनता को क्या मिला?
बरेली रेंज का प्रदेश में अव्वल आना यह दर्शाता है कि थानों के भीतर अब काम करने का तरीका बदला है। जब किसी जिले या रेंज की रैंकिंग सुधरती है, तो इसका सीधा असर पीड़ित की सुनवाई पर पड़ता है।
पुलिस का आईजीआरएस में अव्वल होना यह सुनिश्चित करता है कि अब छोटे से छोटे विवाद भी फाइलों में नहीं दबेंगे। इससे पुलिस और जनता के बीच के भरोसे की खाई कम होती है और कानून-व्यवस्था में सुधार आता है। बरेली के नागरिकों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है कि उनकी आवाज सुनी जा रही है और उस पर ठोस कार्रवाई भी हो रही है।




