दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव (DUSU) के नतीजों ने एक बार फिर कैंपस की राजनीति का पारा हाई कर दिया है। लंबे इंतजार के बाद आए इन परिणामों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अपना दबदबा बरकरार रखते हुए 4 में से 3 प्रमुख पदों पर शानदार जीत हासिल की है। इस जीत के साथ ही कैंपस की गलियों में समर्थकों का उत्साह देखते ही बन रहा है।
ABVP का कैंपस में दबदबा
चुनाव नतीजों के मुताबिक, ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पदों पर कब्जा जमाया है। यश डबास को अध्यक्ष पद के लिए भारी मतों से विजेता घोषित किया गया है, जो अब दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों की आवाज बनेंगे। कैंपस में हुए इस चुनाव में युवाओं का उत्साह काफी ज्यादा था, जो मतदान प्रतिशत में भी साफ झलकता था।
निर्दलीय उम्मीदवार का बड़ा उलटफेर
इस बार के चुनाव में सबसे चौंकाने वाला मोड़ उपाध्यक्ष पद पर देखने को मिला। NSUI से टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन ने सभी को पछाड़ते हुए उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। यह जीत न केवल दीपांशु के लिए एक बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि छात्र राजनीति में निर्दलीय उम्मीदवारों की ताकत को भी दर्शाती है।
कौन हैं नए बॉस यश डबास?
यश डबास की जीत को एबीवीपी की रणनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। एक इंटरनेशनल खिलाड़ी से लेकर कैंपस की राजनीति के केंद्र तक का उनका सफर छात्रों के बीच काफी चर्चा में है। यश डबास अब डूसू अध्यक्ष के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों की समस्याओं और उनके अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा देंगे।
मायने और प्रभाव
डूसू चुनाव के ये नतीजे केवल एक छात्र संगठन की जीत या हार नहीं हैं, बल्कि ये आने वाले समय की राजनीतिक दिशा भी तय करते हैं। इनके प्रमुख मायने ये हैं:
- युवाओं की प्राथमिकता: कैंपस में छात्र किन मुद्दों को तरजीह दे रहे हैं, यह इन नतीजों से स्पष्ट होता है।
- राजनीतिक संदेश: बड़े राजनीतिक दलों के लिए ये नतीजे संकेत हैं कि युवाओं के बीच उनकी स्वीकार्यता कितनी है।
- कैंपस कल्चर: निर्दलीय उम्मीदवार की जीत यह बताती है कि छात्र केवल पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि व्यक्ति और उनके काम पर भी वोट कर रहे हैं।


