बरेली पुलिस महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एसएसपी ने लंबित मामलों की फाइलों को खंगाला। जिले के विभिन्न थानों में 680 से अधिक विवेचनाएं (investigations) लंबे समय से अटकी पड़ी हैं, जिससे पीड़ितों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए अब कड़ा एक्शन लिया गया है।
30 दिन का अल्टीमेटम, सुस्त अफसरों पर कार्रवाई
एसएसपी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगले 30 दिनों के भीतर 90 दिन से पुरानी सभी पेंडिंग फाइलों का निपटारा हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। यह अभियान उन अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती है जो अब तक फाइलों को दबाकर बैठे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, शहर का इज्जतनगर थाना इस फेहरिस्त में सबसे ऊपर है, जहां सबसे ज्यादा मामले लंबित पाए गए हैं।
जांच के घेरे में 12 थानेदार
पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए 12 थाना प्रभारियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। आरोप है कि ये थानेदार अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे और विवेचनाओं में अनावश्यक देरी की। विभाग का कहना है कि अगर जांच में इनकी लापरवाही साबित होती है, तो इन पर विभागीय दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या है खास?
इस सख्ती के दूरगामी असर देखने को मिलेंगे। आम जनता के लिए इसके मायने ये हैं:
- त्वरित न्याय की उम्मीद: वर्षों से थानों के चक्कर काट रहे फरियादियों को अब जल्द फैसले मिल सकेंगे।
- पुलिस की जवाबदेही: थानेदारों पर जांच बैठने से पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और फाइलों को लटकाने का चलन कम होगा।
- सुरक्षा का एहसास: मामलों का निपटारा होने से अपराधियों में कानून का डर फिर से कायम होगा।
यह पहल दिखाती है कि बरेली पुलिस प्रशासन अब अपनी छवि सुधारने और जनता का विश्वास जीतने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है।




