कानपुर के गोविंदनगर इलाके में उस समय हड़कंप मच गया जब एक महिला पार्षद ने अपने घर के बाहर हो रही शराबखोरी का विरोध किया। आरोप है कि नशे में धुत एक ऑटो चालक ने न केवल अभद्रता की, बल्कि महिला पार्षद के साथ छेड़खानी करते हुए उन्हें ऑटो में खींचने की कोशिश भी की। इस घटना ने क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित महिला पार्षद के अनुसार, 19 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे उनके पड़ोस में रहने वाला ऑटो चालक विनोद कुमार अपने तीन साथियों के साथ उनके घर के सामने ऑटो खड़ा करके शराब पी रहा था। जब पार्षद ने इस सार्वजनिक उपद्रव का विरोध किया, तो आरोपी भड़क गए। गाली-गलौज के साथ शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते छेड़खानी और शारीरिक बल प्रयोग में बदल गया।
पुलिस की कार्रवाई और विवाद की जड़
घटना के बाद आरोपी धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए गोविंदनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस इंस्पेक्टर अशोक कुमार दुबे ने बताया कि आरोपी ऑटो चालक पार्षद के पड़ोस के ही एक जर्जर मकान में किराएदार है। बताया जा रहा है कि मकान खाली कराने को लेकर दोनों पक्षों के बीच काफी समय से रंजिश चल रही है, जिसने अब इस बदसलूकी का रूप ले लिया है।
मायने और प्रभाव
- महिला सुरक्षा पर सवाल: एक जनप्रतिनिधि के साथ हुई इस घटना ने स्थानीय महिलाओं की सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है।
- कानून का डर खत्म: सार्वजनिक स्थानों पर नशेबाजी और दबंगई दिखाती है कि अपराधियों में पुलिसिया कार्रवाई का खौफ कम हो रहा है।
- प्रशासनिक लापरवाही: मकान खाली कराने जैसे दीवानी विवादों में पुलिस की समय रहते सक्रियता न होना बड़ी घटनाओं को जन्म देता है।
कानपुर पुलिस अब आरोपियों की धरपकड़ के लिए दबिश दे रही है। शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि अगर जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा। प्रशासन को इस मामले में कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी ताकि दोबारा ऐसी हिम्मत कोई न कर सके।


