दिवाली की खुशियों के बीच आगरा के घरों में जोर-शोर से साफ-सफाई चल रही है, लेकिन यही चमक-धमक अब कई लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। एसएन मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभाग में मरीजों की लंबी कतारें इस बात की गवाह हैं कि घर की सफाई के दौरान इस्तेमाल होने वाले केमिकल और धूल-मिट्टी सेहत पर भारी पड़ रही है।
ओपीडी में उमड़ा मरीजों का हुजूम
आंकड़े डराने वाले हैं। केवल मंगलवार को ही एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में त्वचा रोग से पीड़ित करीब 320 मरीज पहुंचे। डॉक्टरों का कहना है कि बीते कुछ दिनों में स्किन एलर्जी, रैशेज और खुजली के मामलों में अचानक उछाल आया है। त्योहारों के उत्साह के बीच अस्पतालों के चक्कर काटना मरीजों के लिए किसी सजा से कम नहीं है।
क्यों हो रही है यह समस्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं। पहला, लंबे समय से बंद कमरों और कोनों में जमी धूल के कण, जो एलर्जी पैदा करते हैं। दूसरा, दीवारों की रंगाई और सफाई में इस्तेमाल होने वाले मजबूत केमिकल वाले डिटर्जेंट और पेंट।
- सीधा संपर्क: बिना ग्लव्स पहने केमिकल युक्त सफाई उत्पादों का इस्तेमाल।
- धूल के कण: पुरानी अलमारियों और जालों की सफाई के दौरान सांस और त्वचा के जरिए एलर्जी।
- केमिकल रिएक्शन: पेंट और थिनर की गंध से भी कुछ लोगों में स्किन सेंसिटिविटी बढ़ रही है।
मायने और प्रभाव: सावधान रहना क्यों जरूरी है?
इस स्थिति का सीधा असर आम आदमी के बजट और त्योहार के आनंद पर पड़ रहा है। एक तरफ सफाई का जुनून है, तो दूसरी तरफ बढ़ता मेडिकल खर्च। डॉक्टरों की सलाह है कि सफाई के दौरान रबर के दस्ताने पहनें और नाक-मुंह को मास्क से ढक कर रखें। यदि त्वचा पर लाल चकत्ते या ज्यादा खुजली महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लें। त्योहार खुशियों का है, लेकिन आपकी लापरवाही इसे परेशानी में बदल सकती है।



