अगर आप उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे पर सफर करते हैं, तो अब आपको अपनी ड्राइविंग की आदतों में बदलाव लाना होगा। सर्दियों की आहट के साथ ही राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। 1 नवंबर से प्रदेश के सभी प्रमुख एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा कम कर दी जाएगी ताकि कोहरे के कारण होने वाले जानलेवा हादसों को रोका जा सके।
1 नवंबर से लागू होगा नया नियम
उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने स्पष्ट कर दिया है कि सर्दियों के मौसम में घने कोहरे के दौरान दृश्यता (visibility) कम होने पर स्पीड लिमिट में कटौती की जाएगी। अगर कोहरे में विजिबिलिटी 50 मीटर से कम होती है, तो ड्राइवरों को अपनी गाड़ी की रफ्तार मौजूदा गति से आधी से भी कम रखनी होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
पिछले कुछ वर्षों में यमुना एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे पर कोहरे के कारण दर्जनों भयानक दुर्घटनाएं देखी गई हैं। कई मामलों में विजिबिलिटी शून्य होने के कारण तेज रफ्तार गाड़ियां एक-दूसरे से टकरा गईं। प्रशासन का मानना है कि गति पर नियंत्रण ही इन हादसों को रोकने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।
- नियम का दायरा: प्रदेश के सभी बड़े एक्सप्रेसवे पर सख्ती।
- स्पीड मॉनिटरिंग: आधुनिक सीसीटीवी कैमरों और स्पीड गन के जरिए निगरानी।
- चालान: तय सीमा से तेज गाड़ी चलाने पर भारी जुर्माने का प्रावधान।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर असर
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना लंबी दूरी का सफर तय करते हैं। अक्सर लोग समय बचाने के चक्कर में कोहरे के बीच भी 100 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार से गाड़ी दौड़ाते हैं, जो अब जेब पर भारी पड़ सकता है और जान जोखिम में डाल सकता है।
प्रशासन का यह कदम सड़क सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी पहल है। हालांकि, ड्राइवरों के लिए अब जरूरी हो गया है कि वे सफर पर निकलने से पहले मौसम का हाल जानें और समय लेकर घर से निकलें। याद रखें, रफ्तार से ज्यादा आपकी जान कीमती है।



