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एक्सक्लूसिव: पीएम आवास योजना में बड़ा खेल, 47 लाख रुपये डकार गए 117 लोग; अब विभाग सख्त

प्रधानमंत्री आवास योजना का सपना लाखों गरीबों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया था, लेकिन कानपुर से आई एक खबर ने सरकारी तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ 117 ऐसे लाभार्थी सामने आए हैं, जिन्होंने सरकारी मदद की किस्तें तो लीं, लेकिन अपना आशियाना बनाने के बजाय उन रुपयों को अपनी जेब में दबा लिया।

47 लाख रुपये का सरकारी बंदरबांट

साल 2017 से 2024 के बीच की यह लापरवाही अब उजागर हुई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इन 117 लोगों ने पहली और दूसरी किस्त के रूप में कुल 47 लाख रुपये से अधिक की रकम सरकारी खजाने से निकाल ली। हैरान करने वाली बात यह है कि मौके पर जाकर जांच करने पर पता चला कि वहां ईंट तक नहीं रखी गई है।

विभाग की सख्ती, अब जारी होंगे नोटिस

लंबे समय तक चुप्पी साधे बैठने के बाद अब जिला प्रशासन और आवास विभाग ने इन लाभार्थियों को घेरे में लेने की तैयारी कर ली है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब इन सभी 117 लोगों को नोटिस भेजा जाएगा। अगर तय समय सीमा के भीतर मकान का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ या पैसे वापस नहीं किए गए, तो कानूनी कार्रवाई के साथ वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

मायने और प्रभाव: आम जनता पर असर

यह मामला महज 47 लाख रुपये के गबन का नहीं है, बल्कि यह उन जरूरतमंद परिवारों के हक पर डाका है जो आज भी छत के लिए भटक रहे हैं।

  • सीधा नुकसान: ऐसे लाभार्थियों की लापरवाही के कारण योग्य आवेदकों की वेटिंग लिस्ट लंबी होती जा रही है।
  • पारदर्शिता की चुनौती: समय-समय पर फिजिकल वेरिफिकेशन न होने के कारण सरकारी योजनाओं में इस तरह की धांधली को बढ़ावा मिलता है।
  • भविष्य की राह: विभाग का यह कदम उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो सरकारी अनुदान को निजी संपत्ति समझने की गलती करते हैं।

आम जनता को यह समझना होगा कि पीएम आवास योजना का पैसा करदाताओं का पैसा है। ऐसे मामलों में समय रहते शिकायत दर्ज कराना और विभाग की कार्यप्रणाली पर नजर रखना अब स्थानीय नागरिकों की भी जिम्मेदारी बनती जा रही है।

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