आगरा की सदर तहसील में जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों का दिन सरकारी अव्यवस्था की भेंट चढ़ रहा है। दफ्तर के बाहर लगी लंबी कतारें और लोगों के चेहरे पर साफ दिखती परेशानी यह बताने के लिए काफी है कि यहां की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
टोकन मशीन बनी शोपीस
पिछले कई दिनों से निबंधन कार्यालय (Registry Office) में लगी टोकन मशीनें पूरी तरह खराब पड़ी हैं। तकनीक के इस युग में जहां काम आसान होना चाहिए था, वहां अब लोग मैनुअल सिस्टम की अव्यवस्था के बीच पिस रहे हैं। टोकन न मिलने की वजह से न तो लोगों को अपने नंबर का अंदाजा लग पा रहा है और न ही काम समय पर निपट रहा है।
दो घंटे का इंतजार और बेहाल व्यवस्था
स्थिति यह है कि हर व्यक्ति को अपने बारी के लिए कम से कम दो से तीन घंटे का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। तहसील परिसर में जगह की भारी कमी के कारण लोग कार्यालय के बाहर ही धूप में खड़े होने को मजबूर हैं। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए तो यह स्थिति और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण बन गई है, क्योंकि बैठने के लिए पर्याप्त जगह तक नहीं है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर चोट
आगरा जैसे बड़े शहर में, जहां हर दिन सैकड़ों संपत्तियों की रजिस्ट्री होती है, वहां ऐसी तकनीकी चूक का असर बड़े पैमाने पर पड़ता है। इसका सीधा असर इन बिंदुओं पर दिख रहा है:
- समय का नुकसान: रजिस्ट्री के लिए आने वाले लोगों को अपना काम छोड़कर पूरा दिन तहसील में बिताना पड़ रहा है।
- भ्रष्टाचार को बढ़ावा: ऐसी अव्यवस्था दलालों के लिए चांदी काटने का मौका बन जाती है, जो जल्दी काम कराने के नाम पर लोगों से अवैध वसूली करते हैं।
- शासन की साख: डिजिटल इंडिया और ऑनलाइन सेवाओं के दावों के बीच, एक छोटी सी मशीन का ठीक न होना सरकारी कार्यप्रणाली की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है।
स्थानीय प्रशासन को इस पर तुरंत संज्ञान लेने की जरूरत है ताकि आम जनता को इस अनावश्यक परेशानी से मुक्ति मिल सके।



