आसमान में दहशत: स्क्वॉक कोड 7500 ने बढ़ाई चिंता
हवाई सफर के दौरान जब अचानक कॉकपिट से ‘हाईजैक’ का सिग्नल मिलता है, तो सुरक्षा एजेंसियों के हाथ-पांव फूलना स्वाभाविक है। कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला जब फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट (AI-142) ने अचानक अपना रास्ता बदला और जयपुर की ओर रुख कर लिया। पायलट द्वारा ‘स्क्वॉक कोड 7500’ (Squawk Code 7500) एक्टिवेट करते ही हड़कंप मच गया, क्योंकि यह कोड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विमान के अपहरण का संकेत माना जाता है।
क्या था पूरा मामला?
विमान के हवा में होने के दौरान ही सुरक्षा तंत्र को अलर्ट मिला, जिससे जयपुर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी घोषित कर दी गई। आनन-फानन में फायर ब्रिगेड, मेडिकल टीम और सुरक्षा बलों को रनवे के पास तैनात किया गया। हालांकि, विमान सुरक्षित रूप से जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड कर गया, जिसके बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। शुरुआती जांच में पता चला है कि विमान को बम की धमकी मिली थी, जिसके बाद एहतियातन यह कदम उठाया गया।
जांच के घेरे में सुरक्षा प्रोटोकॉल
- कोड 7500 का मतलब: विमानन भाषा में यह कोड सीधे तौर पर ‘अनलावफुल इंटरफेरेंस’ यानी हाईजैक की ओर इशारा करता है।
- सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय: DGCA और एयर इंडिया की टीम अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह महज एक अफवाह थी या इसके पीछे किसी आतंकी संगठन का हाथ है।
- यात्रियों की सुरक्षा: विमान के सुरक्षित उतरने के बाद सभी यात्रियों को विमान से बाहर निकाला गया और सुरक्षा जांच की गई।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी?
इस घटना ने एक बार फिर उड़ानों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के दिनों में बम की धमकियों के चलते विमानों को डायवर्ट करने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे न केवल यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, बल्कि एयरलाइंस कंपनियों को करोड़ों का नुकसान भी उठाना पड़ता है। यह घटना दर्शाती है कि सुरक्षा के मामले में पायलट किसी भी प्रकार का जोखिम लेने के बजाय ‘प्रोटोकॉल’ को प्राथमिकता देते हैं। आम जनता के लिए यह समझना जरूरी है कि ऐसी आपातकालीन स्थितियों में अफरातफरी से बचने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के दिशा-निर्देशों का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण होता है।


