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कानपुर: बेटी की मौत के बाद दामाद को जहर देने और छत से फेंकने का आरोप, कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज

कानपुर के कल्याणपुर इलाके से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पारिवारिक कलह ने खौफनाक रूप ले लिया। अपनी पत्नी की मौत के गम में डूबे एक दामाद पर ससुराल वालों ने न केवल जानलेवा हमला किया, बल्कि उसे जहर खिलाकर छत से नीचे फेंकने का भी गंभीर आरोप है। पीड़ित संदीप कुरील ने जब पुलिस से न्याय की गुहार लगाई और कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उसे न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

ससुराल में कैसे बढ़ी रंजिश?

पीड़ित संदीप कुरील अंबेडकरपुरम का निवासी है, जिसकी शादी 27 फरवरी 2020 को दिव्या भारती के साथ हुई थी। संदीप के अनुसार, 19 मार्च 2025 को उसकी पत्नी दिव्या ने किन्हीं कारणों से जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिससे उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पत्नी की मौत के बाद से ही संदीप और उसके ससुराल पक्ष के बीच विवाद गहराने लगा, जो धीरे-धीरे हिंसा में बदल गया।

क्या है पूरा मामला?

संदीप ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उसके साले प्रबल प्रताप उर्फ अंशू, उसकी पत्नी प्रियंका, सास सियावती और मौसी सास सुमनलता ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। संदीप का दावा है कि:

  • ससुराल के लोगों ने उसका मुंह दबाकर उसे जबरन जहरीला पदार्थ खिलाने की कोशिश की।
  • जब उसने इसका विरोध किया, तो साले और उसकी पत्नी ने मिलकर उसे घर की पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया।
  • इस क्रूर हमले में संदीप की रीढ़ की हड्डी, पसलियां और पैर का टखना टूट गया।

पुलिस की कार्रवाई

स्थानीय पुलिस ने शुरुआत में इस मामले में टालमटोल की, लेकिन अदालत के सख्त हस्तक्षेप के बाद कल्याणपुर थाना पुलिस हरकत में आई। थाना प्रभारी केशव कुमार तिवारी के मुताबिक, कोर्ट के आदेश पर संबंधित आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की बारीकी से जांच कर रही है।

मायने और प्रभाव

यह घटना न केवल पारिवारिक रिश्तों में आ रही कड़वाहट को दर्शाती है, बल्कि पुलिसिया कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है। अक्सर ऐसे मामलों में शुरुआती शिकायतों को अनसुना कर दिया जाता है, जिससे अपराधी का हौसला और बढ़ जाता है। इस मामले में जिस तरह से कोर्ट को दखल देना पड़ा, वह यह साबित करता है कि घरेलू विवादों में समय रहते कानूनी हस्तक्षेप कितना जरूरी है। कानपुर जैसे बड़े शहर में इस तरह की वारदात सुरक्षा और मानवीय संवेदनशीलता के गिरते स्तर की ओर इशारा करती है।

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