JNU के पूर्व प्रोफेसर और कांग्रेस पर चौतरफा हमला
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के एक बर्खास्त प्रोफेसर पर लगे यौन उत्पीड़न के संगीन आरोपों ने दिल्ली से लेकर हरियाणा तक की राजनीति में भूचाल ला दिया है। मामला इतना बढ़ गया है कि अब सड़क से लेकर दफ्तरों तक विरोध प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया है।
हरियाणा के नारनौल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महिला मोर्चा ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने महावीर चौक पर इकट्ठा होकर कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की और छात्राओं को न्याय दिलाने की मांग दोहराई।
कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन
विवाद की आंच दिल्ली तक पहुंच गई है। विपक्षी दल कांग्रेस को घेरने के लिए भाजपा महिला मोर्चा की नेता और कार्यकर्ता सीधे पार्टी मुख्यालय (कांग्रेस दफ्तर) तक पहुंच गईं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कांग्रेस एक ऐसे व्यक्ति का बचाव कर रही है, जिस पर 11 छात्राओं ने गंभीर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं।
हालात तनावपूर्ण होते देख दिल्ली पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारी महिला नेताओं को पुलिस ने डिटेन कर लिया और बस में बिठाकर वहां से ले गई।
मामला क्या है?
- JNU के एक पूर्व प्रोफेसर पर 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
- आरोपों के बाद प्रोफेसर को यूनिवर्सिटी से बर्खास्त कर दिया गया है।
- मामले में दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
- भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर ‘महिला विरोधी’ होने का आरोप लगाया है।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी?
यह पूरा घटनाक्रम किसी एक यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला सुरक्षा और शिक्षण संस्थानों की गरिमा का बड़ा सवाल बन गया है। जब भी कोई आरोपी किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होता है, तो जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आम जनता के लिए यह देखना महत्वपूर्ण है कि क्या ऐसे संवेदनशील मामलों में कानून अपना काम बिना किसी भेदभाव के करेगा। राजनीतिक प्रदर्शन तो चलते रहेंगे, लेकिन अंततः असली जीत तभी होगी जब पीड़ित छात्राओं को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए त्वरित और पारदर्शी न्याय मिलेगा। शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना अब सरकार और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।



