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चित्रकूट हत्याकांड: भतीजी से छेड़छाड़ की शिकायत करना पड़ा भारी, घर में घुसकर महिला की हत्या

चित्रकूट के मऊ थाना क्षेत्र में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अपनी ही भतीजी की सुरक्षा के लिए आवाज उठाना एक परिवार के लिए काल बन गया। छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराने के महज कुछ घंटों के भीतर, आरोपी ने घर में घुसकर ऐसी खूनी खेल खेला जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित परिवार का आरोप है कि शनिवार को उनकी 17 वर्षीय बेटी के साथ गांव के ही श्याम आधार मिश्रा ने छेड़छाड़ की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवार ने पुलिस में नामजद तहरीर दी, जिसके बाद पुलिस ने पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट जैसी सख्त धाराओं में मुकदमा तो दर्ज किया, लेकिन आरोपी का मात्र शांतिभंग में चालान कर उसे जमानत पर बाहर आने का रास्ता साफ कर दिया।

घर में घुसकर बरसीं गोलियां

जमानत से बाहर आते ही आरोपी का दुस्साहस और बढ़ गया। रविवार रात करीब 9:30 बजे वह सीधे पीड़िता के घर पहुंचा और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में पीड़िता की चाची की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके चाचा गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायल चाचा को प्राथमिक उपचार के बाद प्रयागराज रेफर किया गया है। घटना के बाद आरोपी ने खुद को भी गोली मारने की कोशिश की, जिससे वह भी गंभीर रूप से घायल है।

पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

इस घटना ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। परिजनों का साफ आरोप है कि पुलिस ने इस संवेदनशील मामले को हल्के में लिया। यदि पुलिस ने आरोपी को जमानत पर छोड़ने के बजाय गंभीरता दिखाई होती, तो शायद एक निर्दोष महिला की जान बच सकती थी। थाने के दरोगा पर भी आरोपी से मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

मायने और प्रभाव

यह घटना सिर्फ एक हत्याकांड नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की एक बड़ी विफलता है। इसके सामाजिक और प्रशासनिक मायने गहरे हैं:

  • न्याय का डर खत्म होना: जब अपराधी जमानत पर आते ही शिकायतकर्ता के घर पर हमला कर देते हैं, तो आम जनता का कानून से भरोसा उठने लगता है।
  • पुलिस की जवाबदेही: पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में पुलिस की ‘शांतिभंग’ जैसी हल्की धाराओं में कार्रवाई करना एक बड़ी लापरवाही है।
  • सुरक्षा का सवाल: छेड़छाड़ जैसी घटनाओं के बाद पीड़िता और उसके परिवार को तुरंत पुलिस सुरक्षा की आवश्यकता होती है, जिसे यहाँ नजरअंदाज किया गया।

इस पूरे मामले में अब एसपी अरुण कुमार सिंह ने टीमों का गठन किया है, लेकिन सवाल वही है—क्या मृतका को न्याय मिलेगा या यह केस फाइलों में दफन हो जाएगा?

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