बरेली स्थित देश के प्रतिष्ठित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) में इन दिनों शांति नहीं, बल्कि भविष्य के पशु चिकित्सकों का आक्रोश देखने को मिल रहा है। बीवीएससी एवं एएच (BVSc & AH) के छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर लगातार चौथे दिन भी धरने पर बैठे हैं। संस्थान परिसर में गूंजते नारों ने प्रशासनिक गलियारों की नींद उड़ा दी है।
क्या है पूरा मामला?
छात्रों की मुख्य मांग इंटर्नशिप स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की है। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में वर्तमान स्टाइपेंड से खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कई दौर की बातचीत के बाद भी संस्थान प्रशासन और छात्रों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है, जिसके चलते विरोध प्रदर्शन जारी है।
प्रशासन का रुख और अभिभावकों को पत्र
संस्थान प्रशासन ने अब एक कड़ा रुख अपनाते हुए सीधे छात्रों के अभिभावकों को पत्र लिखा है। इस पत्र में प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को समझाकर यह आंदोलन खत्म कराएं। हालांकि, छात्रों का कहना है कि यह उनकी आजीविका और सम्मान का सवाल है, और वे अपनी मांगें माने जाने तक पीछे हटने वाले नहीं हैं।
मायने और प्रभाव
यह प्रदर्शन आखिर क्यों अहम है?
- महंगाई का असर: यह आंदोलन इस बात का संकेत है कि देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को भी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
- भविष्य पर संकट: लंबे समय तक चलने वाले इस विरोध प्रदर्शन से छात्रों की एकेडमिक गतिविधियों पर सीधा असर पड़ रहा है, जो लंबे समय में उनके करियर के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- प्रशासनिक जवाबदेही: यह मामला संस्थान और छात्रों के बीच संवाद की कमी को भी उजागर करता है। यदि समय रहते इसका समाधान नहीं निकाला गया, तो यह स्थिति अन्य संस्थानों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है।


