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कानपुर में आवारा कुत्तों का आतंक: खेल रहे मासूम को नोचा, लहूलुहान हालत में अस्पताल में भर्ती

कानपुर के जाजमऊ इलाके में सड़क पर बेखौफ घूम रहे आवारा कुत्तों ने एक और मासूम को अपना शिकार बनाया है। घर के बाहर खेल रहे नौ साल के बच्चे पर कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया, जिससे वह बुरी तरह लहूलुहान हो गया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और लोग बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी डर रहे हैं।

खेलते हुए मासूम पर जानलेवा हमला

रविवार की सुबह टेनरीकर्मी ताजीर हुसैन का नौ वर्षीय बेटा इरशाद अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान एक आवारा कुत्ता पीछे से आया और उसने बच्चे पर झपट्टा मार दिया। कुत्ते ने इरशाद को कई जगहों पर काट लिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास के लोगों ने शोर मचाकर और पत्थर फेंककर बड़ी मुश्किल से बच्चे को बचाया।

नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

इलाके के स्थानीय निवासियों, जिनमें राजू, रफीक और सुरेश शामिल हैं, का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम से इन आवारा कुत्तों की शिकायत की है। उनका आरोप है कि निगम की टीम औपचारिकता पूरी करने के लिए आती तो है, लेकिन पकड़े गए कुत्तों को पास के ही किसी इलाके में छोड़ देती है। यही वजह है कि कुत्ते वापस लौट आते हैं और लगातार लोगों को निशाना बना रहे हैं।

बीते दिन भी हुई थी ऐसी ही घटना

इलाके में कुत्तों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि बड़े भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। शनिवार की सुबह दूध लेने जा रहे एक सिलाई कारीगर पर कुत्तों के पूरे झुंड ने हमला कर दिया था। बार-बार हो रही इन घटनाओं से साफ है कि प्रशासन के दावों के बावजूद स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ती जा रही है।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह

यह घटना कानपुर के शहरी प्रबंधन पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। आवारा कुत्तों की बढ़ती तादाद और उनके हिंसक व्यवहार का सीधा असर आम जनता की सुरक्षा पर पड़ रहा है।

  • सुरक्षा का मुद्दा: जब बच्चे अपने घरों के बाहर भी सुरक्षित नहीं हैं, तो यह सीधे तौर पर नगर निगम की असफलता को दर्शाता है।
  • प्रशासनिक लापरवाही: कुत्तों को पकड़कर पास के मोहल्ले में छोड़ देने की नीति समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह इसे और जटिल बना रही है।
  • स्वास्थ्य जोखिम: रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी के खतरे को देखते हुए, तत्काल नसबंदी और डॉग शेल्टर का प्रभावी संचालन अनिवार्य हो गया है।

स्थानीय प्रशासन को अब जागने की जरूरत है, वरना किसी बड़ी अनहोनी को रोका नहीं जा सकेगा।

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