उत्तराखंड फतह के लिए बसपा ने कसी कमर
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ समय से खामोश चल रही पार्टी अब पहाड़ी राज्यों की सियासत में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए बड़े बदलाव की तैयारी में है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बसपा उत्तराखंड को आगामी चुनावों में प्राथमिकता पर रखेगी। इस बार पार्टी का पूरा जोर ‘विनिंग कैंडिडेट’ यानी जीतने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारने पर है।
आकाश आनंद की वापसी से बदलेगा समीकरण?
सबसे बड़ी चर्चा आकाश आनंद की सक्रिय भूमिका में वापसी को लेकर है। मायावती के उत्तराधिकारी माने जाने वाले आकाश आनंद को फिर से पार्टी संगठन की कमान सौंपे जाने की चर्चाओं ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर दिया है।
आकाश की वापसी केवल एक चेहरा बदलने तक सीमित नहीं रहेगी। माना जा रहा है कि उनके साथ ही उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक के सांगठनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल किया जाएगा। युवा चेहरों को आगे लाकर पार्टी संगठन को नई धार देने की कोशिश की जा रही है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या होगा असर?
- तीसरे विकल्प की मजबूती: उत्तराखंड में अक्सर भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला रहता है। बसपा की सक्रियता इस समीकरण को बिगाड़ सकती है और मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है।
- युवा नेतृत्व का उभार: आकाश आनंद की वापसी का मतलब है कि बसपा अब युवाओं और नए वोटर्स को लुभाने के लिए आधुनिक एजेंडे पर काम करेगी।
- जमीनी बदलाव: प्रत्याशियों के चयन में पार्टी की सख्ती का मतलब है कि इस बार चुनाव में ‘भारी’ उम्मीदवारों के बजाय जनता के बीच पकड़ रखने वाले स्थानीय नेताओं को टिकट मिल सकते हैं।
यह बदलाव न केवल बसपा के भीतर बल्कि राज्य की राजनीति में भी नई हलचल पैदा करेगा। अब देखना यह है कि संगठन में बदलाव के बाद बसपा उत्तराखंड के मतदाताओं का कितना भरोसा जीत पाती है।


