ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ बस अग्निकांड एक ऐसी कहानी छोड़ गया है, जो किसी भी पत्थर दिल इंसान की आंखों में आंसू ला दे। उरई के रहने वाले हरिशरण गुप्ता ने अपने बीमार बेटे की जान बचाने के लिए खुद को मौत के हवाले कर दिया। यह घटना तब हुई जब वे अपने बीटेक कर रहे बेटे ओम को सुरक्षित घर ले जाने के लिए नोएडा पहुंचे थे।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बस में अचानक आग लग गई और देखते ही देखते पूरी बस लपटों में घिर गई। उस खौफनाक मंजर के बीच, जब हर तरफ चीख-पुकार मची थी, हरिशरण गुप्ता ने साहस का परिचय दिया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने बेटे ओम को सुरक्षित खिड़की से बाहर धकेल दिया ताकि उसकी जान बच सके।
बेटा सुरक्षित, पिता की दुखद अंत
बेटा ओम नीचे गिरकर बच तो गया, लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पिता को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। इस हादसे में हरिशरण गुप्ता बुरी तरह झुलस गए और मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि उन्होंने आखिरी पल तक केवल अपने बेटे की सुरक्षा की चिंता की।
मायने और प्रभाव
यह घटना न केवल एक सड़क हादसे की भयावहता को दिखाती है, बल्कि सुरक्षा मानकों पर भी सवाल उठाती है। इसके प्रभाव और मायने निम्नलिखित हैं:
- सार्वजनिक सुरक्षा: एक्सप्रेसवे पर चलने वाली बसों में फायर सेफ्टी के इंतजामात कितने पुख्ता हैं, इसकी जांच होनी चाहिए।
- इमोशनल ट्रॉमा: इस हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। घायल ओम का इलाज चल रहा है, लेकिन पिता को खोने का दुख उसके लिए ताउम्र रहेगा।
- जागरूकता: इस तरह की घटनाएं प्रशासन को बस संचालकों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए मजबूर करती हैं ताकि भविष्य में किसी और का पिता अपनी संतान को न खोए।


