कानपुर में गणेश विसर्जन की शोभायात्रा ने जनजीवन पर बड़ा असर डाला है। भक्ति और आस्था के इस सैलाब के बीच शहर की प्रमुख सड़कें पूरी तरह से जाम हो गईं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात इतने खराब थे कि सायरन बजाती एंबुलेंस भी घंटों गाड़ियों के काफिले में फंसी रही।
शहर की प्रमुख सड़कों पर लगा जाम
लालकुर्ती से गोलाघाट और शुक्लागंज पुल से लेकर गोलाघाट तक गाड़ियां करीब पांच घंटे तक रेंगती रहीं। भीड़ के कारण सड़कें पूरी तरह से ब्लॉक हो गईं, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। हैरानी की बात यह रही कि शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था नदारद दिखी, जिससे अराजकता की स्थिति बनी रही।
प्रभावित इलाके और लोगों की परेशानी
केवल एक रूट ही नहीं, बल्कि शहर के कई अन्य इलाकों में भी स्थिति गंभीर बनी रही। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- कंपनीबाग से सरसैया घाट: यहां भक्तों की भारी भीड़ ने रास्तों को जाम कर दिया।
- घंटाघर और झकरकटी बस अड्डा: इन व्यस्त इलाकों में गाड़ियां रेंगती रहीं, जिससे यात्रियों को समय पर बसें नहीं मिल सकीं।
अस्पताल जाने वाले मरीजों के परिजनों और बस पकड़ने की जल्दी में रहे लोगों को भारी मानसिक तनाव झेलना पड़ा।
मायने और प्रभाव
कानपुर जैसे घनी आबादी वाले शहर में त्योहारों के दौरान ऐसी व्यवस्था का बिगड़ना एक बड़ी चिंता है। आस्था का सम्मान जरूरी है, लेकिन ‘रेड कॉरिडोर’ या एंबुलेंस के लिए स्पष्ट ‘ग्रीन पैसेज’ का अभाव प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। यदि त्योहारों के दौरान पूर्व नियोजित ट्रैफिक डायवर्जन नहीं किया जाता है, तो भविष्य में ऐसी स्थिति से किसी बड़ी अनहोनी का खतरा भी बना रहेगा। प्रशासन को अब आगे के आयोजनों के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट को और अधिक सख्त बनाने की जरूरत है।





