ओवैसी का कानपुर से सीधा ऐलान
उत्तर प्रदेश की सियासत में आने वाले दिनों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कानपुर में एक चुनावी बिगुल फूँकते हुए साफ कर दिया है कि उनका एकमात्र लक्ष्य उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को तीसरी बार बनने से रोकना है।
कानपुर के बर्रा इलाके में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में किसी भी सेक्युलर पार्टी के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मौजूदा हालात को देखते हुए एक मजबूत विकल्प खड़ा करना वक्त की मांग है।
कब्रिस्तान और मस्जिदों पर बरसे ओवैसी
अपने भाषण के दौरान ओवैसी काफी आक्रामक दिखे। उन्होंने कानपुर के बर्रा में कब्रिस्तान और सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने के मामलों पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना राज्य की गंगा-जमुनी तहजीब पर हमला है।
उन्होंने दावा किया कि जल्द ही गठबंधन की रूपरेखा तय कर ली जाएगी। राजनीति के गलियारों में चर्चा है कि 2 अक्टूबर 2026 को इस मुद्दे पर कोई बड़ा औपचारिक ऐलान किया जा सकता है।
मायने और प्रभाव: क्या बदलेगी यूपी की राजनीति?
ओवैसी का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब यूपी में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इस घोषणा के मुख्य प्रभाव ये हो सकते हैं:
- वोट बैंक का समीकरण: अगर ओवैसी किसी बड़े विपक्षी गठबंधन का हिस्सा बनते हैं, तो यह सीधे तौर पर भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
- मुस्लिम वोट बैंक की लामबंदी: ओवैसी का आक्रामक रुख यह संकेत देता है कि वे आगामी चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पैठ और मजबूत करना चाहते हैं।
- गठबंधन की राजनीति: ओवैसी के इस बयान से अन्य क्षेत्रीय दलों पर भी दबाव बढ़ेगा कि वे इस ‘अघोषित’ गठबंधन में शामिल होते हैं या अपनी अलग राह चुनते हैं।
कानपुर की इस रैली ने साफ कर दिया है कि ओवैसी अब यूपी के चुनावी मैदान में किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन से दल उनके साथ हाथ मिलाते हैं।






