क्या UPI पेमेंट पर टैक्स लग रहा है?
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और बाजारों में एक खबर ने हड़कंप मचा रखा है—’UPI ट्रांजेक्शन पर 18% GST’। अलीगढ़ से लेकर मध्य प्रदेश तक के पेट्रोल पंप संचालकों और व्यापारियों ने इसे लेकर मोर्चा खोल दिया है। सवाल यह है कि क्या कल से आपके मोबाइल से होने वाले हर छोटे-बड़े पेमेंट पर टैक्स कटेगा या यह सिर्फ एक अफवाह है?
क्या पूरा अमाउंट टैक्स के दायरे में है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि वित्त मंत्रालय ने इसे लेकर अभी तक कोई नया आधिकारिक फरमान जारी नहीं किया है। असल विवाद MDR (Merchant Discount Rate) को लेकर है। व्यापारी इस बात का विरोध कर रहे हैं कि अगर सरकार बैंक चार्जेस या MDR पर 18% GST लगाने का विचार करती है, तो उसका बोझ ग्राहकों या दुकानदारों पर पड़ेगा।
फिलहाल, आम ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट पहले की तरह ही मुफ्त है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत लेन-देन पर कोई टैक्स नहीं है।
पेट्रोल पंपों पर क्यों मचा है बवाल?
मध्य प्रदेश के कई पेट्रोल पंप डीलर अब 2000 रुपये से ज्यादा के भुगतान के लिए UPI लेने से कतरा रहे हैं। उनकी दलील है कि बैंक ट्रांजेक्शन पर जो चार्ज काटते हैं, वह उनके मुनाफे को कम कर रहा है।
- व्यापारियों का तर्क: छोटे मार्जिन वाले बिजनेस में 1-2% का बैंक चार्ज भी भारी पड़ता है।
- सरकार का रुख: डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को देखते हुए सरकार UPI को मुफ्त बनाए रखने के पक्ष में है।
- राज ठाकरे का बयान: इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमाई हुई है, जहां विपक्षी नेता सरकार की टैक्स नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।
मायने और प्रभाव: आम आदमी को क्या समझना चाहिए?
अगर आने वाले समय में व्यापारियों की मांग नहीं मानी गई, तो बाजार में कैश (नकद) का चलन फिर से बढ़ सकता है। पेट्रोल पंप और किराना दुकानों पर छोटे डिजिटल भुगतान बंद होने से आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल, आप निश्चिंत रहें। अपने रोजमर्रा के यूपीआई पेमेंट पर अभी आपको कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं देना है। यह पूरी लड़ाई सरकार, बैंकों और बड़े मर्चेंट एसोसिएशंस के बीच एक आर्थिक नीति का मामला है। अगर इसमें कोई बदलाव होता है, तो उसका सीधा असर सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं, बल्कि व्यापारियों के कमीशन स्ट्रक्चर पर होगा।





