मुरादाबाद में केंद्र सरकार की आधा दर्जन से अधिक महत्वाकांक्षी योजनाएं फाइलों के जाल में फंसकर दम तोड़ रही हैं। आम जनता के विकास के लिए बनी ये योजनाएं आज सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ा रही हैं, क्योंकि धरातल पर उतारने के लिए न तो बजट है और न ही कोई स्पष्ट लक्ष्य।
क्यों ठप पड़ा है विकास का पहिया?
शहर से लेकर गांव तक विकास की उम्मीद जगाने वाली छह प्रमुख केंद्रीय योजनाएं पिछले काफी समय से सुस्त पड़ी हैं। इनमें सबसे प्रमुख है ‘सांसद आदर्श ग्राम योजना’, जिसे शुरू हुए वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन पिछले तीन सालों से इसके लिए एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है। स्थिति यह है कि नए गांवों का चयन तक नहीं हो पा रहा है।
किन योजनाओं पर लगा है ग्रहण?
प्रशासनिक आंकड़ों की मानें तो निम्नलिखित क्षेत्रों में काम पूरी तरह से ठप है:
- कौशल विकास योजना: युवाओं को हुनरमंद बनाने का सपना अधूरा है।
- रोजगार सृजन कार्यक्रम: फंड के अभाव में नए प्रोजेक्ट्स शुरू नहीं हो रहे।
- स्वच्छ वायु अभियान: बजट नहीं होने से शहर की हवा सुधारने के प्रयास फाइलों में सिमट गए हैं।
- उज्ज्वला योजना: नए लक्ष्य निर्धारित न होने से जरूरतमंद लाभार्थी अभी भी इंतजार में हैं।
इन सभी योजनाओं के लिए वर्ष 2026-27 के लिए न तो कोई बजट आवंटित हुआ है और न ही सरकार ने कोई स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं। अधिकारी भी अब ऊपर से फंड आने का इंतजार कर रहे हैं।
मायने और प्रभाव: जनता को क्या नुकसान?
इस प्रशासनिक सुस्ती का सीधा असर आम मुरादाबाद वासियों पर पड़ रहा है। जब सरकारी योजनाएं बजट के अभाव में ठप होती हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं और आधारभूत सुविधाओं का विकास रुक गया है।
दिल्ली अगर इन योजनाओं को लेकर अपनी दरियादिली दिखाए और समय पर फंड जारी करे, तो न केवल शहर की सूरत बदल सकती है, बल्कि हजारों युवाओं के हाथों को काम मिल सकता है। फिलहाल, जनता को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और केंद्रीय मंत्रालयों के साथ तालमेल बिठाकर बजट की रुकावट दूर की जाएगी।



