अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के साथ ही अब इसके प्रबंधन को लेकर नई बहस छिड़ गई है। मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन की प्रक्रिया ने न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि आम श्रद्धालुओं के बीच भी जिज्ञासा और सवालों का अंबार खड़ा कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जब से सीईओ पद के लिए प्रक्रिया शुरू की है, तब से ही यह सुर्खियों में है। ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के अनुसार, 6 जुलाई को गठित विशेष खोज समिति को देशभर से कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे।
इन आवेदनों की लंबी फेहरिस्त में सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का नाम भी शामिल है। विवाद तब गरमाया जब सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चयन की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए। जानकारी के मुताबिक, 11 अगस्त को उनका इंटरव्यू भी आयोजित किया गया था, जिसके बाद से ही चयन की प्रक्रिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
ट्रस्ट का जवाब और पारदर्शिता पर जोर
सवालों के घेरे में आए ट्रस्ट ने अब पलटवार करते हुए स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया नियम और शर्तों के अनुसार ही चल रही है। ट्रस्ट का दावा है कि इतने बड़े संस्थान के लिए एक सक्षम और अनुभवी व्यक्ति की तलाश करना अनिवार्य है, जिसके लिए एक व्यवस्थित सर्च कमेटी काम कर रही है।
- 5,585 आवेदनों में से योग्य उम्मीदवारों की छंटनी।
- रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के इंटरव्यू पर स्पष्टीकरण।
- ट्रस्ट का दावा: चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष।
मायने और प्रभाव
अयोध्या के इस मंदिर का संचालन केवल एक धार्मिक संस्थान का काम नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में सीईओ का पद बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि वित्तीय प्रबंधन से लेकर मंदिर की दैनिक कार्यप्रणाली तक सब कुछ इसी पर निर्भर करेगा।
स्थानीय जनता और दानदाताओं के लिए यह जानना जरूरी है कि मंदिर का प्रबंधन किसके हाथ में होगा। अगर चयन प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो भविष्य में यह विवाद बढ़ सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें ट्रस्ट के अगले आधिकारिक फैसले पर टिकी हैं कि आखिर मंदिर की कमान किसे सौंपी जाती है।






