राम नगरी अयोध्या एक बार फिर पूरी दुनिया को अपनी भव्यता से चकित करने के लिए तैयार है। सात नवंबर 2026 को होने वाला दीपोत्सव न केवल आस्था का उत्सव होगा, बल्कि यह एक नया विश्व रिकॉर्ड भी बनेगा। इस बार सरयू के 56 घाटों पर 30 लाख दीयों की रोशनी से पूरी अयोध्या दूधिया चमक से नहा उठेगी।
भव्य तैयारियों का दौर शुरू
दीपोत्सव को लेकर योगी सरकार ने अभी से कमर कस ली है। राम की पैड़ी से लेकर सरयू तट तक हर कोने को सजाया जा रहा है। पिछले कई सालों से अयोध्या अपने ही रिकॉर्ड तोड़ रही है, लेकिन इस बार 30 लाख का आंकड़ा तय करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती और गौरव का विषय है।
कैसे सजेंगे सरयू के घाट?
- कुल 56 घाटों का चयन किया गया है।
- स्वयंसेवकों की एक बड़ी फौज दीये बिछाने और जलाने के काम में जुटेगी।
- सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ड्रोन कैमरे से पूरे आयोजन की निगरानी की जाएगी।
- स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए विशेष मिट्टी के दीयों का उपयोग किया जाएगा।
मायने और प्रभाव
अयोध्या का यह दीपोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। इसके कई गहरे प्रभाव हैं:
पर्यटन में उछाल: इस आयोजन से अयोध्या में पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है, जिससे स्थानीय व्यापार और होटल उद्योग को जबरदस्त फायदा मिल रहा है।
अर्थव्यवस्था को मजबूती: लाखों दीयों का निर्माण स्थानीय कुम्हारों के लिए रोजगार का बड़ा अवसर लेकर आता है, जो ‘वोकल फॉर लोकल’ को सीधे तौर पर गति देता है।
सांस्कृतिक पहचान: वैश्विक स्तर पर अयोध्या की छवि अब एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित हो चुकी है, जो आने वाले समय में रोजगार के हजारों नए रास्ते खोलेगी।




