क्या पाकिस्तान का बदला है रुख?
पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर इनामी राशि बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दी है। भारतीय संसद, पठानकोट और पुलवामा हमले का मुख्य आरोपी मसूद अजहर दशकों से वैश्विक आतंकवाद का पर्याय बना हुआ है। दुनिया भर में अपनी छवि सुधारने और FATF की सख्ती से बचने के लिए पाकिस्तान अब इसे एक बड़े कदम के तौर पर दिखा रहा है।
सच्चाई या सिर्फ आंखों में धूल झोंकने का प्रयास?
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कदम केवल एक दिखावा है। मसूद अजहर पर इनाम की राशि बढ़ाना उन अंतरराष्ट्रीय दबावों का परिणाम है जो पाकिस्तान पर लगातार बने हुए हैं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP ने भी इसे पाकिस्तान की पुरानी चाल बताया है, जिसका मकसद केवल दुनिया को यह जताना है कि वे आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं।
भारत के लिए क्यों है यह चिंता का विषय?
- पुलवामा और पठानकोट हमलों के जख्म आज भी ताजे हैं।
- मसूद अजहर जैसे आतंकियों का पाकिस्तान की सरजमीं पर खुलेआम घूमना सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का यह कदम सहानुभूति बटोरने के लिए एक रणनीतिक चाल हो सकती है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
यह घटनाक्रम यह साबित करता है कि पाकिस्तान अभी भी आतंकवाद को लेकर दोहरी नीति अपना रहा है। जब तक मसूद अजहर जैसे खूंखार आतंकी सलाखों के पीछे नहीं होते, तब तक दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर संकट बना रहेगा। भारत के लिए कूटनीतिक दबाव बनाए रखना अब भी सबसे बड़ी प्राथमिकता है ताकि पाकिस्तान को उन आतंकियों पर कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया जा सके जो भारतीय सुरक्षा को चुनौती देते हैं।





