नई दिल्ली में आयोजित हुए बहुप्रतीक्षित BRICS समिट 2026 का औपचारिक समापन हो गया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी दिल्ली से अपने देश के लिए रवाना हो गए हैं। तीन दिनों तक चले इस महासम्मेलन ने वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
पुतिन और मोदी की अहम मुलाकात
रूसी राष्ट्रपति पुतिन के दौरे पर दुनिया भर की नजरें टिकी थीं। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता बेहद सफल रही। चर्चा का मुख्य केंद्र रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक रिश्ते रहे। दोनों नेताओं ने मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच आपसी विश्वास को और गहरा करने पर सहमति जताई है।
सुरक्षा का घेरा और कूटनीतिक हलचल
पुतिन के आगमन से पहले ही दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। रूसी सैन्य विमानों का नोएडा के पास एयरबेस पर उतरना और पुतिन के विशेष सुरक्षा काफिले की मौजूदगी ने इस दौरे की गंभीरता को दर्शाया। समिट के दौरान पीएम मोदी ने न केवल पुतिन बल्कि मिस्र के राष्ट्रपति सहित कई अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों से भी चर्चा की।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या है खास?
इस समिट का भारत पर सीधा असर पड़ने वाला है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- रक्षा और अर्थव्यवस्था: पुतिन के साथ हुई चर्चा से भारत की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती मिलेगी, जो लंबे समय में सुरक्षा के लिए अहम है।
- वैश्विक मंच पर भारत: ब्रिक्स की अध्यक्षता और सफल आयोजन ने साबित किया है कि भारत आज दुनिया में ‘विश्व मित्र’ की भूमिका में है।
- व्यापारिक अवसर: समिट के दौरान हुए समझौतों से आने वाले समय में निवेश और रोज़गार के नए रास्ते खुलने की पूरी उम्मीद है।
यह समिट न केवल कूटनीतिक जीत है, बल्कि यह भारत को आने वाले वर्षों में ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित करने की एक बड़ी सीढ़ी साबित हुई है।




