कानपुर की सड़कों पर मौत का धागा फिर से अपना खूनी खेल दिखा रहा है। बुधवार शाम का वक्त था, जब एक महिला कोच अपनी स्कूटी से घर लौट रही थीं, तभी फूलबाग चौराहे के पास अचानक चाइनीज मांझे ने उन पर हमला कर दिया। हेलमेट होने की वजह से उनकी जान तो बच गई, लेकिन गर्दन पर लगे गहरे जख्म ने पूरे शहर को फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब बंद होगा ये जानलेवा सिलसिला?
घटना का पूरा विवरण
पीड़िता का नाम निधि है, जो ग्वालटोली की रहने वाली हैं और कैंट के एक जिम में बतौर कोच काम करती हैं। वह बॉक्सिंग की ट्रेनिंग भी देती हैं। बुधवार शाम को अपनी ड्यूटी खत्म कर जब वह घर की ओर बढ़ रही थीं, तभी हवा में लहराते धारदार चाइनीज मांझे ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। गनीमत रही कि उन्होंने हेलमेट पहन रखा था, वरना परिणाम बेहद घातक हो सकते थे। इसके बावजूद, उनकी गर्दन पर गहरा कट लगा और वह बुरी तरह लहूलुहान हो गईं। आनन-फानन में उनके परिजनों ने उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
प्रशासन की सुस्ती पर सवाल
इस पूरी घटना ने पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फीलखाना थाने के कार्यवाहक प्रभारी सतेंद्र का कहना है कि उन्हें घटना की जानकारी नहीं है। सवाल यह है कि आखिर प्रतिबंधित होने के बावजूद शहर में चाइनीज मांझा बिक कहां रहा है? प्रशासन के दावों के बीच, आम जनता हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों पर निकलने को मजबूर है।
मायने और प्रभाव: क्यों जरूरी है सख्ती?
यह मामला केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहर में फैली उस अव्यवस्था का आईना है जो लोगों की जान ले रही है। इसके प्रभाव और मायने निम्नलिखित हैं:
- आम जनता का डर: दोपहिया वाहन चालकों के लिए शहर की सड़कें अब असुरक्षित होती जा रही हैं।
- प्रतिबंध सिर्फ कागजों पर: प्रशासन द्वारा बार-बार बैन लगाने के बावजूद, बाजार में चाइनीज मांझे की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है।
- सुरक्षा का सवाल: अगर एक सतर्क महिला कोच के साथ यह हो सकता है, तो बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का क्या?
क्या करें? अगर आपको कहीं भी चाइनीज मांझा बिकता हुआ दिखे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या नगर निगम को सूचित करें। आपकी एक सतर्कता किसी की जान बचा सकती है।





