तेलंगाना विधानसभा परिसर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब आईएएस अधिकारी नवीन मित्तल के पर्सनल असिस्टेंट (PS) राजू अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। वहां मौजूद लोगों को समझने में देर नहीं लगी कि मामला गंभीर है। मौके पर मौजूद राज्य के मंत्री वाकिति श्रीहरि ने बिना वक्त गंवाए मोर्चा संभाला और राजू को सीपीआर (CPR) देना शुरू कर दिया।
मंत्री की जद्दोजहद और बदकिस्मती
मंत्री श्रीहरि ने राजू की सांसें वापस लाने के लिए काफी देर तक सीपीआर दिया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल ले जाने के बाद चिकित्सकों ने राजू को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, यह मामला कार्डियक अरेस्ट का था।
सीपीआर का महत्व और बढ़ती हृदय समस्याएं
घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें मंत्री श्रीहरि पूरे जज्बे के साथ कर्मचारी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। यह वाकया एक बार फिर से इस बात की ओर इशारा करता है कि कम उम्र में दिल का दौरा पड़ना अब एक गंभीर समस्या बन चुका है।
- सीख: किसी भी इमरजेंसी में सीपीआर का ज्ञान जीवन बचा सकता है।
- सावधानी: समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना अनिवार्य है।
- स्थितियां: भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव का सीधा असर दिल पर पड़ रहा है।
मायने और प्रभाव
इस घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। एक सुरक्षित माने जाने वाले सरकारी दफ्तर के भीतर इस तरह की मेडिकल इमरजेंसी यह बताती है कि कार्डियक अरेस्ट किसी को भी, कहीं भी अपनी चपेट में ले सकता है। आम जनता के लिए संदेश साफ है—स्वास्थ्य को हल्के में न लें। प्रशासनिक गलियारों में भी अब कार्यस्थल पर बेहतर मेडिकल सुविधाएं होने की चर्चा तेज हो गई है। यह दुखद घटना यह भी सिखाती है कि आम नागरिकों को भी बेसिक लाइफ सपोर्ट और सीपीआर की जानकारी होनी चाहिए ताकि विपरीत परिस्थितियों में कीमती जान बचाई जा सके।
