मातम में बदला आस्था का सफर
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। राजस्थान के गोगामेड़ी मंदिर से दर्शन कर वापस लौट रहे श्रद्धालुओं की एक पिकअप गाड़ी ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसमें 13 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। इस हादसे में मरने वालों में कई ऐसे हैं जिनके रिश्ते गहरे थे—कोई पति-पत्नी था, तो कोई सगे भाई-बहन।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
बदायूं जिले के विभिन्न गांवों के करीब 35 श्रद्धालु पिकअप गाड़ी में सवार होकर गोगामेड़ी धाम गए थे। रविवार देर रात करीब डेढ़ बजे जब यह गाड़ी बागपत के बड़ागांव के पास पहुंची, तो चालक ने रास्ता भटकने के बाद गाड़ी को गलत दिशा में मोड़ने की कोशिश की।
इसी दौरान गाजियाबाद की तरफ से आ रहे एक तेज रफ्तार कैंटर ने पिकअप को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि गाड़ी डिवाइडर से टकराकर पलट गई और उसमें सवार लोग उछलकर दूर जा गिरे। देखते ही देखते एक्सप्रेसवे पर चीख-पुकार मच गई और सड़कों पर खून बिखर गया।
प्रशासन की कार्रवाई और मदद
- घायलों का उपचार: हादसे में 23 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें खेकड़ा सीएचसी, जिला अस्पताल के साथ-साथ मेरठ मेडिकल कॉलेज और दिल्ली के GTB अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
- आर्थिक सहायता: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुखद घटना पर संज्ञान लेते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
- जांच पड़ताल: जिला प्रशासन, डीएम अस्मिता लाल और एसपी सूरज कुमार राय ने रात में ही मोर्चा संभाल लिया था, जबकि एडीजी भानु भास्कर ने घटनास्थल का जायजा लिया है।
मायने और प्रभाव: यह हादसा हमें क्या सिखाता है?
यह दुखद घटना सड़क सुरक्षा और एक्सप्रेसवे पर यातायात नियमों की अनदेखी पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। गलत तरीके से यू-टर्न लेना या एक्सप्रेसवे पर दिशा का भ्रम होना अक्सर काल का ग्रास बन जाता है। इस हादसे ने एक साथ कई परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं, जो स्थानीय समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। यह सरकारी तंत्र के लिए भी सबक है कि एक्सप्रेसवे पर साइनेज और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद किया जाए ताकि भविष्य में आस्था का यह सफर मौत का सफर न बने।




