दिल्ली का सत्य निकेतन इलाका बना ‘मलबे का ढेर’
राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके सत्य निकेतन में उस समय अफरातफरी मच गई, जब एक पांच मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर पड़ी। यह इलाका छात्रों और पीजी (PG) के लिए जाना जाता है, जिसके चलते मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
घटना की जानकारी मिलते ही एनडीआरएफ (NDRF) और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबे के बीच से अब तक छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जिन्हें गंभीर हालत में एम्स (AIIMS) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है।
‘कमरे में ही फंस गए छात्र’, चश्मदीदों ने बताया खौफनाक मंजर
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इमारत गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि दूर-दूर तक के लोग सहम गए। इस बिल्डिंग में बड़ी संख्या में छात्र रहते थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इमारत के कुछ हिस्सों में अवैध निर्माण चल रहा था, जिससे इसकी नींव कमजोर हो गई थी।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने अपना गोवा का दौरा बीच में ही रद्द कर दिया है। उन्होंने दिल्ली प्रशासन और एनडीआरएफ को हर संभव मदद के निर्देश दिए हैं ताकि मलबे में फंसे आखिरी व्यक्ति तक जल्द पहुंचा जा सके।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों है यह बड़ी बात?
- अवैध निर्माण पर सवाल: दिल्ली के रिहायशी इलाकों में बिना नक्शा पास कराए बहुमंजिला इमारतें खड़ी करना अब जानलेवा साबित हो रहा है।
- छात्रों की सुरक्षा: कोचिंग हब के आसपास चल रहे अवैध पीजी और हॉस्टल्स की सुरक्षा मानकों की जांच अब अनिवार्य हो गई है।
- नगर निगम की जवाबदेही: इस हादसे ने एमसीडी (MCD) के बिल्डिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो ऐसी जर्जर इमारतों को पहले ही चिन्हित करने में नाकाम रहे।
यह हादसा चेतावनी है कि यदि समय रहते पुरानी और अवैध इमारतों पर कड़ा एक्शन नहीं लिया गया, तो राजधानी के अन्य इलाकों में भी ऐसी त्रासदी दोबारा देखने को मिल सकती है।




