नवाबों के शहर लखनऊ की फिजाओं में इस बार भक्ति का अलग ही रंग घुला हुआ था। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर पूरी राजधानी ‘जय कन्हैया लाल की’ और ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठी। कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर न केवल मंदिरों में, बल्कि हर घर और सरकारी परिसरों में गजब का उत्साह देखने को मिला।
भव्य सजावट और भक्ति का संगम
लखनऊ के मंदिरों को फूलों और विद्युत झालरों से दुल्हन की तरह सजाया गया था। मुख्य बाजारों से लेकर गलियों तक कृष्ण भक्ति के रंग बिखर रहे थे। रिजर्व पुलिस लाइंस में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिरकत की, जहां उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कान्हा के जन्मोत्सव का शुभारंभ किया। इस दौरान पुलिस परिवार के सदस्यों ने भी बढ़-चढ़कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
राजभवन और शहर में छाई रौनक
राजभवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। शहर भर के मंदिरों में दिनभर भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। भक्तों ने पूरे दिन व्रत रखा और आधी रात को जब 12 बजे शंखनाद हुआ, तो मंदिरों में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। घरों में भी नन्हे कृष्ण को झूले में बिठाकर माखन-मिश्री का भोग लगाया गया।
मायने और प्रभाव: क्यों खास है यह उत्सव?
- सामाजिक एकता: जन्माष्टमी का त्योहार लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब को और मजबूती देता है, जहां सभी समुदाय के लोग इस भक्तिमय माहौल का आनंद लेते हैं।
- आर्थिक गतिशीलता: इस बड़े उत्सव के चलते शहर के बाजारों, फूल विक्रेताओं और मिठाई की दुकानों पर काफी रौनक दिखी, जिसने स्थानीय अर्थव्यवस्था में सकारात्मक योगदान दिया।
- सांस्कृतिक विरासत: कृष्ण लीलाओं के मंचन और झांकियों के जरिए नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति और धर्मग्रंथों की कहानियों से जुड़ने का मौका मिला।
यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि लखनऊ की एकजुटता और उल्लास का भी प्रतीक है। आधी रात को हुई आरती के बाद जब प्रसाद बांटा गया, तो हर चेहरा भक्ति के आनंद से खिला हुआ था।




