कानपुर में पांडु नदी का रौद्र रूप अब आम लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन चुका है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते ही कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे लोग अपनी सालों की कमाई और घर को पानी में डूबते देख बेबस हैं।
इन इलाकों में मचा है हाहाकार
नदी के उफान से मर्दनपुरवा, मायापुरम, गुजैनी, ग्राम पिपौरी और मेहरबान सिंह का पुरवा समेत कई इलाके गंभीर रूप से प्रभावित हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि लोगों की चौखट तक पानी पहुँच चुका है, जिससे उनका सामान्य जीवन पूरी तरह ठप हो गया है।
एनडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन
बढ़ते खतरे को देखते हुए एनडीआरएफ की टीम ने मोर्चा संभाल लिया है। ग्राम पिपौरी में फंसे 60 में से 55 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि गोपालपुरम और जरौली फेज-2 से भी करीब 30 परिवारों को रेस्क्यू कर सुरक्षित ठिकानों और गेस्ट हाउसों में बने राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है।
- प्रभावित बस्तियों में संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुके हैं।
- मवेशियों के चारे और भोजन-पानी की भारी किल्लत महसूस की जा रही है।
- फसलें डूबने से किसानों की कमर टूट गई है।
मायने और प्रभाव
पांडु नदी की यह बाढ़ केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों के लिए एक बड़ा संकट है जो मेहनत से अपना आशियाना बनाते हैं। सड़कों का संपर्क टूटना और राहत शिविरों में मजबूरन रहना यह दर्शाता है कि जल निकासी और नदी किनारे बसी बस्तियों की सुरक्षा को लेकर एक ठोस दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता है। प्रशासन की सक्रियता राहत तो दे रही है, लेकिन बाढ़ के बाद का जीवन इन परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरेगा।




