बरेली के बहेड़ी इलाके में कुदरत का कहर बरपा है। उत्तराखंड के गौला बैराज से छोड़े गए 27 हजार क्यूसेक पानी ने किच्छा नदी का स्वरूप बदल दिया है। अचानक आए इस सैलाब ने स्थानीय प्रशासन और आम जनता की नींद उड़ा दी है, क्योंकि पानी ने अब रिहायशी इलाकों और औद्योगिक ठिकानों को अपनी चपेट में ले लिया है।
मेगा फूड पार्क में घुसा पानी
सीएम योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में पहचाने जाने वाले मेगा फूड पार्क में पानी घुसने से हड़कंप मचा है। नदी का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि सुरक्षा की तमाम दीवारें और इंतजाम धरे के धरे रह गए। फिलहाल, पार्क परिसर में जलभराव के चलते कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है और मशीनों व कच्चे माल को सुरक्षित निकालने की कोशिशें की जा रही हैं।
प्रशासन का अलर्ट और मौजूदा स्थिति
नदी के किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। स्थानीय लेखपाल और पुलिस की टीमें लगातार निगरानी रख रही हैं ताकि किसी भी अनहोनी को टाला जा सके।
- बहेड़ी के निचले इलाकों में मुनादी: प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
- फसलों को नुकसान: नदी के किनारे की कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों की कमर टूट गई है।
- पशुपालकों की चिंता: चारे की समस्या और मवेशियों को सुरक्षित रखने की जद्दोजहद जारी है।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या है स्थिति?
इस बाढ़ का सीधा असर बहेड़ी की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। मेगा फूड पार्क जैसे बड़े प्रोजेक्ट में पानी का घुसना न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि यह क्षेत्र में निवेश और विकास की रफ्तार को भी धीमा कर सकता है। आने वाले कुछ दिन बेहद संवेदनशील हैं। यदि जलस्तर नहीं घटा, तो आसपास के कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से पूरी तरह कट सकता है। प्रशासन को अब दीर्घकालिक समाधान के तौर पर नदी तटबंधों को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि हर साल आने वाली इस आपदा से जनता को निजात मिल सके।




