कानपुर के हर्षनगर इलाके में रहने वाले लोगों की सांसें अटकी हुई हैं। स्मार्ट सिटी बनने का सपना देख रहे शहर की हकीकत यह है कि यहां की जमीन अब पैरों तले से खिसक रही है। हर्षनगर में एक बार फिर डॉट नाले के ऊपर की सड़क धंस गई है, जिससे एक विशालकाय गड्ढा बन गया है।
मौत का जाल: क्या है स्थिति?
मंगलवार को हुई ताजा घटना में लगभग 8 फीट जमीन और धंस गई, जिससे कुल गड्ढा अब 25 फीट लंबा और 10 फीट गहरा हो चुका है। स्थिति इतनी विकराल है कि सड़क का नामोनिशान मिटने की कगार पर है और आवागमन के लिए अब केवल दो फीट का संकरा रास्ता बचा है।
बता दें कि इसी जगह पर 27 अगस्त को भी भारी धंसाव हुआ था। नगर निगम की लचर कार्यप्रणाली और बार-बार हो रही बारिश ने मरम्मत के काम को पूरी तरह से ठप कर दिया है।
प्रशासन की लापरवाही और खतरा
- मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।
- बारिश के कारण मिट्टी लगातार बह रही है, जिससे आसपास के घरों की नींव भी खतरे में है।
- इलाके के लोगों के लिए पैदल चलना भी जानलेवा बन गया है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर असर
कानपुर के पुराने ढर्रे पर चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर की यह तस्वीर किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। यह महज एक गड्ढा नहीं, बल्कि नगर निगम की उस कार्यप्रणाली का आईना है जहां अस्थायी समाधानों पर करोड़ों खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुरक्षा शून्य है।
यदि समय रहते इस नाले की संरचनात्मक ऑडिट (Structural Audit) नहीं कराई गई, तो आसपास के रिहायशी मकान ढह सकते हैं। स्थानीय निवासियों के लिए अब प्रशासन की फाइलों से बाहर आकर ठोस इंजीनियरिंग समाधान की जरूरत है, वरना आने वाली बारिश शहर के एक बड़े हिस्से को गहरे संकट में डाल सकती है।




