किचन का बजट संभालने वाली गृहणियों के लिए एक बड़ी राहत और हैरानी की खबर है। आगरा की सिकंदरा मंडी में प्याज के दाम अचानक नरम पड़े हैं और वहां अच्छी क्वालिटी का प्याज 30 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। लेकिन, जैसे ही आप अपनी कॉलोनी या गली के नुक्कड़ वाली दुकान पर पहुंचते हैं, वही प्याज 50 से 60 रुपये का भाव मांग रहा है।
मंडी से बाजार तक: कीमतों में ये अंतर क्यों?
इस बड़े अंतर के पीछे की वजह सीधे तौर पर सप्लाई चेन और बिचौलियों का खेल है। मंडी में प्याज की आवक अब सामान्य दिनों के मुकाबले 75 फीसदी तक सिमट गई है। पहले जहां मंडी में रोजाना 100 टन से अधिक प्याज पहुंचता था, वहीं अब यह मात्रा घटकर महज 15 से 30 टन रह गई है।
सप्लाई कम, फिर भी मंडी में रेट कम कैसे?
आर्थिक जानकारों की मानें तो मंडी में माल कम होने के बावजूद दाम कम रहने का कारण थोक व्यापारियों के पास मौजूद पुराना स्टॉक है। वहीं, फुटकर विक्रेता यानी आपके मोहल्ले के दुकानदार परिवहन खर्च, भंडारण की बर्बादी और अपना मुनाफा जोड़कर दाम तय करते हैं। यही कारण है कि मंडी और खुदरा बाजार के बीच 20 से 30 रुपये का गैप बन गया है।
मायने और प्रभाव: आपकी जेब पर क्या असर?
- बजट पर दबाव: अगर आप रोजाना की जरूरत का प्याज सीधे खुदरा दुकानों से खरीदते हैं, तो आप महीने के अंत तक अपने बजट में बड़ा अंतर महसूस करेंगे।
- सीधा लाभ: थोक मंडियों (जैसे सिकंदरा मंडी) से थोक में खरीदारी करना इस समय समझदारी भरा फैसला हो सकता है।
- बाजार का मिजाज: जब तक आवक पूरी तरह सामान्य नहीं होती, तब तक खुदरा बाजारों में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
आम जनता के लिए सलाह यही है कि अगर संभव हो तो पास की थोक मंडी से ही साप्ताहिक खरीदारी करें, ताकि बिचौलियों के भारी मुनाफे से बचा जा सके। बाजार की यह स्थिति आने वाले कुछ दिनों तक ऐसी ही बने रहने के आसार हैं।



