क्या गरीबों के इलाज के नाम पर हो रही है वसूली?
हाथरस जिला अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। यहां एंटी-रैबीज इंजेक्शन लगवाने आए मरीजों के आयुष्मान कार्ड से 1700 रुपये की अवैध कटौती का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकारी अस्पताल, जहां इलाज पूरी तरह मुफ्त होना चाहिए, वहां मरीजों के कार्ड से पैसे कटते देख हर कोई हैरान है।
कैसे खुला ये गोरखधंधा?
मामले की गहराई से जांच करने पर पता चला कि इन मरीजों को अस्पताल में भर्ती तक नहीं किया गया था। आयुष्मान भारत योजना के नियमों के अनुसार, एंटी-रैबीज के मरीजों को भर्ती करने की जरूरत नहीं होती है। बावजूद इसके, उनके कार्ड से मोटी रकम काटी गई। हैरानी की बात यह है कि इस काटी गई राशि में से 219 रुपये सीधे एक निजी संस्था की जेब में जा रहे थे।
CDO ने तलब की रिपोर्ट
इस धांधली की खबर मिलते ही मुख्य विकास अधिकारी (CDO) ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को तलब किया है और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में गड़बड़ी पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर असर
- सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग: आयुष्मान कार्ड गरीबों के लिए वरदान है, लेकिन ऐसी घटनाओं से योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
- भ्रष्टाचार की जड़ें: मरीजों के नाम पर निजी संस्थाओं को पैसे ट्रांसफर करना बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
- जवाबदेही का संकट: स्वास्थ्य विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लानी होगी ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
यह मामला महज 1700 रुपये का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के भीतर पनप रहे उस भ्रष्टाचार का है जो सीधे गरीब की जेब पर डाका डाल रहा है। देखना होगा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है।



