कानपुर के सीएसजेएमयू (CSJMU) परिसर में शनिवार की शाम कुछ अलग ही थी। जब ‘जज्बात कॉन्सर्ट’ की शुरुआत हुई, तो माहौल में संगीत और रूहानी अहसासों का ऐसा संगम घुला कि हर कोई बस मंत्रमुग्ध रह गया। मंच पर जब सुरों की मल्लिका प्रतिभा सिंह बघेल ने अपने अंदाज में गायकी शुरू की, तो दर्शक अपनी कुर्सियों से बंधे रह गए।
प्रतिभा, स्वयं और मनिका ने बिखेरा जादू
इस शानदार शाम को यादगार बनाने में प्रतिभा सिंह बघेल के साथ ही स्वयं और मनिका ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। कार्यक्रम का नाम ‘जज्बात’ था और कलाकारों ने वाकई अपने सुरों के जरिए लोगों के जज्बातों को छुआ।
- प्रतिभा सिंह बघेल की मखमली आवाज ने क्लासिकल और सूफी गानों से समां बांधा।
- स्वयं की जादुई प्रस्तुति ने युवाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
- मनिका के गायकी के अंदाज ने माहौल को एक अलग ही ऊंचाई दी।
कानपुर के संगीत प्रेमियों के लिए एक यादगार शाम
सीएसजेएमयू का ऑडिटोरियम खचाखच भरा हुआ था। लोग देर रात तक इन कलाकारों की परफॉर्मेंस का आनंद लेते रहे। यह केवल एक संगीत कार्यक्रम नहीं था, बल्कि कला और संस्कृति का एक ऐसा संगम था जिसने कानपुर के सांस्कृतिक पटल पर अपनी गहरी छाप छोड़ी है।
मायने और प्रभाव: शहर के लिए क्यों खास है ये आयोजन?
कानपुर जैसे औद्योगिक शहर में ‘जज्बात’ जैसे कॉन्सर्ट्स का होना यह बताता है कि यहाँ का जनमानस अब कला और संगीत के प्रति अधिक जागरूक और उत्साहित है। इस तरह के आयोजनों का प्रभाव सीधा युवाओं की रचनात्मकता पर पड़ता है।
स्थानीय स्तर पर ऐसे बड़े कलाकारों का आना न केवल शहर की छवि को बेहतर बनाता है, बल्कि उभरते हुए कलाकारों को भी एक बड़ा मंच और प्रेरणा प्रदान करता है। आने वाले समय में ऐसे सांस्कृतिक उत्सव शहर की पहचान को नई दिशा देने में मददगार साबित होंगे।




