उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक बार फिर हाई-स्पीड ट्रेनों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पहुंचने से ठीक पहले तेजस राजधानी एक्सप्रेस पर पथराव की घटना ने यात्रियों के बीच दहशत फैला दी है। इस अचानक हुए हमले ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि यात्रियों की जान को भी खतरे में डाल दिया था।
क्या है पूरा मामला?
घटना शुक्रवार रात करीब 10:35 बजे की है। तेजस राजधानी एक्सप्रेस जैसे ही कानपुर सेंट्रल के आउटर एरिया से गुजर रही थी, तभी ट्रेन पर जोरदार पत्थर बरसाए गए। यात्रियों के अनुसार, हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि ट्रेन के ए-4 कोच का शीशा बुरी तरह चटक गया। अंधेरे का फायदा उठाकर किए गए इस हमले से बोगी के अंदर बैठे यात्रियों में हड़कंप मच गया।
यात्रियों में खौफ का मंजर
ट्रेन में सवार यात्रियों ने बताया कि अचानक हुई आवाज से ऐसा लगा जैसे कोई धमाका हुआ हो। शीशा टूटने के बाद पत्थर कोच के अंदर तक आ गिरे, जिससे यात्रियों को चोटिल होने का डर सताने लगा। गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई बड़ा जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यात्रियों का अनुभव बेहद डरावना रहा।
सुरक्षा पर उठते सवाल
- बार-बार होने वाली घटनाएं: कानपुर के आउटर और ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रेनों पर पथराव की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं।
- सुरक्षा तंत्र की नाकामी: तेजस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में इस तरह की घटना रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर सवालिया निशान लगाती है।
- जांच की मांग: स्थानीय प्रशासन और आरपीएफ ने मौके पर जाकर मुआयना किया है, लेकिन अभी तक हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी है।
मायने और प्रभाव
इस घटना का सीधा असर यात्रियों के भरोसे पर पड़ता है। जब राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में सुरक्षा के दावे हवा-हवाई साबित होते हैं, तो आम यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। यह घटना साबित करती है कि रेलवे ट्रैक के आसपास निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है। यदि समय रहते इन उपद्रवी तत्वों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन को अब सीसीटीवी और गश्त बढ़ाकर सख्ती दिखानी होगी।




