रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है, लेकिन उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में इस दिन सरकारी वादों और व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए निकलीं बहनें जब बस स्टैंड पहुंचीं, तो वहां उन्हें खुशियों की जगह मायूसी और संघर्ष का सामना करना पड़ा।
बस स्टैंड पर उमड़ा जनसैलाब, सिस्टम हुआ फेल
सुबह से ही फिरोजाबाद बस अड्डे पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई। दूर-दराज के इलाकों में जाने के लिए बसें कम थीं और यात्रियों की संख्या हजारों में। घंटों तक धूप और गर्मी में खड़ी महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों की हालत बदतर हो गई।
- भीड़ के कारण महिलाओं को बस में जगह मिलना नामुमकिन हो गया था।
- अतिरिक्त बसों की घोषणा केवल कागजों तक ही सीमित नजर आई।
- कई यात्री तो टिकट होने के बावजूद बस में सवार नहीं हो सके।
घंटों का इंतजार, नहीं मिली राहत
बसों की कमी के कारण प्राइवेट वाहनों और टैक्सी वालों ने भी मौके का फायदा उठाकर मनमाना किराया वसूला। कई बहनें अपने भाइयों के घर तक समय पर नहीं पहुंच सकीं, जिससे रक्षाबंधन के उत्साह पर पानी फिर गया। प्रशासन के दावों और हकीकत के बीच का यह अंतर फिरोजाबाद के यात्रियों के लिए किसी सजा से कम नहीं था।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर असर
इस पूरी स्थिति ने यह साबित कर दिया है कि त्योहारों के दौरान रोडवेज की तैयारियां हर बार की तरह ‘ढाक के तीन पात’ साबित हुईं। इसका सबसे बड़ा असर मध्यम और गरीब वर्ग पर पड़ता है, जो सुरक्षित और सस्ती सरकारी बस सेवा पर निर्भर रहता है।
जब सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था त्योहारों के पीक सीजन में फेल होती है, तो यह सीधा संदेश है कि जमीनी स्तर पर प्लानिंग की भारी कमी है। अगर प्रशासन समय रहते अतिरिक्त बसों का संचालन सुनिश्चित नहीं करता है, तो जनता का सरकारी तंत्र से भरोसा उठना स्वाभाविक है। आने वाले त्योहारों के लिए इसे एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।



