हाथरस की गलियों में आज भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व ‘रक्षाबंधन’ धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुबह से ही बाजारों में रौनक है और बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रेशम की डोर बांधने के लिए उत्साहित हैं। इस बार रक्षाबंधन का पर्व विशेष है क्योंकि श्रावण पूर्णिमा तिथि पूरे दिन मान्य रहेगी, जिससे बहनों को राखी बांधने के लिए काफी लंबा समय मिलेगा।
रक्षाबंधन का महत्व और परंपरा
रक्षाबंधन केवल एक धागा नहीं, बल्कि भाई और बहन के बीच के भरोसे और सुरक्षा का प्रतीक है। हाथरस के विभिन्न मोहल्लों में भाई अपनी बहनों के घर पहुंच रहे हैं। घरों में पारंपरिक पकवान बन रहे हैं और खुशियों का माहौल बना हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण मास की पूर्णिमा को ही बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं।
राखी बांधने के लिए तीन प्रमुख शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस साल रक्षाबंधन पर ग्रहों की स्थिति बेहद शुभ बनी हुई है। हालांकि पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है, लेकिन यदि आप विशेष शुभ समय की तलाश में हैं, तो ये तीन मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ हैं:
- पहला शुभ समय: सुबह 09:12 से 10:45 तक।
- दूसरा शुभ समय: दोपहर 12:20 से 01:55 तक।
- तीसरा शुभ समय (अमृत काल): शाम 04:30 से 06:10 तक।
इन समयों पर पूजा करना और राखी बांधना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या है खास?
रक्षाबंधन का यह पर्व हाथरस के स्थानीय बाजारों के लिए भी बड़ी आर्थिक हलचल लेकर आता है। मिठाई की दुकानों, उपहार के स्टालों और गिफ्ट गैलरी में भारी भीड़ देखी जा रही है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार भद्रा काल का साया न होने के कारण भाई-बहनों को राखी के समय को लेकर कोई संशय नहीं है। यह त्योहार परिवारों के बीच संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने का एक अवसर है, जो व्यस्त जीवनशैली में अपनों के करीब आने का मौका देता है।




