उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में कुदरत का एक ऐसा क्रूर चेहरा सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। कतार गांव में बुधवार की दोपहर कक्षा आठ की छात्रा भोली पर उस वक्त मौत बनकर बिजली गिरी, जब वह मासूमियत से अपने घर के पीछे खेत में मवेशी चरा रही थी। इस दुखद हादसे ने न सिर्फ एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि पूरे गांव में मातम का माहौल पैदा कर दिया है।
स्कूल से लौटते ही आया मौत का बुलावा
12 वर्षीय भोली, जो रमेश प्रजापति की बेटी थी, अपनी पढ़ाई और घर के कामों में हाथ बंटाने के लिए जानी जाती थी। परिजनों के मुताबिक, स्कूल से आने के बाद उसने घर पर भोजन किया और फिर अपनी गाय-बकरी लेकर खेत की ओर निकल गई। नियति को कुछ और ही मंजूर था, और चंद पलों में ही वह तेज चमक के साथ गिरी आसमानी बिजली की चपेट में आ गई।
अस्पताल पहुंचते ही दम तोड़ा
घटना के समय पास ही खेल रही भोली की छोटी बहन अंशिका बाल-बाल बच गई। आनन-फानन में गंभीर रूप से झुलसी भोली को परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कमासिन ले गए। वहां मौजूद डॉ. दिनेश राजपूत ने बताया कि अस्पताल पहुंचने तक बालिका की सांसे थम चुकी थीं। चिकित्सा टीम ने उसे मृत घोषित कर दिया, जिससे परिजनों का कलेजा फट पड़ा।
मायने और प्रभाव: क्यों जरूरी है सावधानी?
यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि बदलते मौसम के मिजाज में अब खुले आसमान के नीचे रहना कितना खतरनाक हो सकता है। बांदा और बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में बिजली गिरने की घटनाएं अक्सर जानलेवा साबित होती हैं। इसके प्रभाव और बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें:
- चेतावनी तंत्र: मौसम विभाग की ओर से जारी होने वाली ‘वज्रपात’ की चेतावनी को हल्के में न लें।
- सुरक्षित स्थान: खराब मौसम या काले बादल दिखाई देने पर तुरंत पक्के मकान या सुरक्षित शेल्टर की ओर जाएं।
- पेड़ों से दूरी: खुले मैदान में अकेले पेड़ के नीचे खड़े होना बिजली को आमंत्रित करने जैसा है।
- प्रशासन की जिम्मेदारी: आपदा प्रबंधन विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली से बचाव के लिए अधिक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
फिलहाल, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है और मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। भोली की मौत का सन्नाटा उसके घर में पसरा है और पूरा गांव एक होनहार बेटी को खोने के गम में डूबा है।



