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यूपी: बागपत में टोल प्लाजा पर खूनी संघर्ष, भाजपा नेताओं पर लाठी-डंडों से हमला; 15 कर्मियों पर FIR

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर मचा बवाल

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर स्थित काठा टोल प्लाजा उस समय रणभूमि में बदल गया, जब भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं और टोल कर्मियों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। इस हमले में भाजपा के जिलाध्यक्ष सहित पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

सहारनपुर से भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर बासित अली के कार्यभार ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए कार्यकर्ता दिल्ली जा रहे थे। रास्ते में काठा टोल प्लाजा पर टोल टैक्स के भुगतान को लेकर विवाद शुरू हुआ, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया।

भाजपा नेताओं का आरोप है कि टोल कर्मियों ने अचानक लाठी-डंडों और लोहे की सरिया से हमला कर दिया। इस दौरान न केवल कार्यकर्ताओं को पीटा गया, बल्कि उनकी गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की गई और रुपये व मोबाइल भी छीनने का आरोप है।

दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे

  • भाजपा कार्यकर्ताओं का पक्ष: घायलों का कहना है कि उन्होंने टोल चुकाने के बावजूद उन पर जानलेवा हमला किया गया। वे किसी तरह जान बचाकर वहां से भागे।
  • टोल प्रबंधन का पक्ष: टोल मैनेजर अंकित धामा ने आरोप लगाया कि करीब 20-25 गाड़ियों में सवार लोगों ने जबरन बैरियर हटाकर निकलने की कोशिश की और विरोध करने पर उनके स्टाफ के साथ मारपीट की।

पुलिस की कार्रवाई

घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। बागपत पुलिस ने 15 अज्ञात टोल कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, जिसके आधार पर दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मायने और प्रभाव (Impact & Analysis)

यह खबर क्यों मायने रखती है?
यह घटना टोल प्लाजा पर आए दिन होने वाली नोकझोंक का एक चरम रूप है। जब सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं और सार्वजनिक सेवा प्रदाताओं के बीच इस तरह की हिंसा होती है, तो यह कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवालिया निशान खड़े करती है। बागपत जैसे संवेदनशील इलाके में इस तरह की घटना न केवल आम जनता में डर पैदा करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि छोटे से विवाद को सुलझाने के लिए संवाद के बजाय हिंसा का रास्ता अपनाना कितना खतरनाक हो सकता है। अब जनता की नजरें पुलिस की निष्पक्ष जांच पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोषियों को सजा मिल पाएगी।

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