अलीगढ़ के डीएस कॉलेज के छात्र सचिन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद कैंपस का माहौल पूरी तरह से गरमा गया है। न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे विधि छात्रों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। छात्र अब किसी भी हाल में आरएमपीयू (RMPU) प्रशासन को बख्शने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।
प्रदर्शन का शोर और पुलिस के साथ नोकझोंक
शनिवार देर शाम जब छात्र सचिन के लिए कैंडल मार्च निकाल रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने तूल पकड़ लिया और पुलिस तथा छात्रों के बीच धक्का-मुक्की हुई। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाया जा रहा है।
कुलपति के इस्तीफे की उठ रही मांग
विरोध कर रहे छात्रों का सीधा कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही के कारण ही एक होनहार छात्र ने अपनी जान गंवाई है। नाराज छात्र संघ ने साफ कर दिया है कि जब तक आरएमपीयू के कुलपति अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू नहीं होती, तब तक यह आंदोलन थमेगा नहीं।
- छात्रों की मुख्य मांग: कुलपति का तत्काल इस्तीफा।
- घटना की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग।
- मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और सहायता।
मायने और प्रभाव: ये मामला क्यों है अहम?
यह आंदोलन सिर्फ एक छात्र की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अलीगढ़ जैसे शिक्षा के प्रमुख केंद्रों में अगर छात्रों को सड़क पर उतरकर अपनी सुरक्षा और न्याय के लिए लड़ना पड़ रहा है, तो यह सिस्टम की विफलता है। स्थानीय लोग और अभिभावक अब इस बात से डरे हुए हैं कि शिक्षा परिसरों में सुरक्षा का स्तर क्या है। अगर प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह विरोध अन्य कॉलेज परिसरों तक फैल सकता है, जिससे राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।




