स्मार्ट सिटी आगरा में एक बार फिर प्रशासन के दावों की पोल खुल गई है। वह सड़क, जिस पर कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काफिला गुजरा था, अब बड़े-बड़े गड्ढों और धंसाव की भेंट चढ़ चुकी है। पैचवर्क के नाम पर खर्च किए गए लाखों रुपये पहली बारिश में ही बह गए।
सफाई या खानापूर्ति: 134 जगहों पर पैचवर्क का सच
सीएम योगी के दौरे से पहले फतेहाबाद रोड को चमकाने के लिए युद्धस्तर पर काम हुआ था। रिकॉर्ड समय में 134 स्थानों पर पैचवर्क किया गया ताकि शहर की साख बची रहे। लेकिन कुदरत की पहली मार ने ही इस काम की गुणवत्ता का पर्दाफाश कर दिया। सड़क की परतें उखड़ चुकी हैं और कई जगह गहरे गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं।
ताजमहल जाने वाले पर्यटक परेशान
ताजमहल देखने आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए यह स्थिति बेहद निराशाजनक है। मुख्य रास्तों पर जलभराव और गड्ढों के कारण यातायात रेंग-रेंग कर चल रहा है। स्थानीय लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इन रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
मायने और प्रभाव
यह घटना केवल एक सड़क के धंसने का मामला नहीं है, बल्कि नगर निगम और विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।
- जवाबदेही का अभाव: इतने बड़े वीआईपी मूवमेंट के बाद भी काम की गुणवत्ता की अनदेखी भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
- स्मार्ट सिटी का दावा: क्या पैचवर्क का मतलब केवल दिखावा है? जनता के टैक्स का पैसा बार-बार एक ही जगह मरम्मत पर खर्च करना प्रशासन की विफलता है।
- सुरक्षा पर खतरा: बारिश के मौसम में इन गड्ढों के कारण किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, जिसके लिए प्रशासन को समय रहते जागना रहते जागना होगा।
आगरा के नागरिकों के लिए अब समय आ गया है कि वे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाएं। एक स्मार्ट सिटी होने के नाते, आगरा की सड़कें कम से कम ऐसी तो नहीं होनी चाहिए जो पहली बरसात न झेल सकें।




